हमें उपासना करने की क्या आवश्यकता है?
ध्यान, सन्ध्या और उपासना के मायने
उपासना में जप, भावना व ईश्वर-समर्पण
देवयज्ञः, जैसा महर्षि दयानन्द कृत पुस्तक पञ्चमहायज्ञविधिः में लिखा है।
वैदिक विद्वानों के भिन्न-भिन्न विषयों पर विचार
ईश्वर को प्राप्त करने के मायने क्या होते हैं?
मनुष्य और ईश्वर के कार्यों में मौलिक भेद
मन का शीघ्रकारी होना – एक वरदान
सुखी और शांत रहने के वैयक्तिक नियम
अपनी ईमानदारी पर पश्चाताप की भावना
सुख की वृद्धि के व्यवहारिक मंत्र
वास्तव में कर्मकाण्ड के मायने क्या होते हैं?
ईश्वर का सान्निध्य हमें कैसे अभयता प्रदान करता है?
क्या सभी के पास एक जैसी बुद्धि होती है?
अकर्मण्यता, प्रमाद और आलस्य में अन्तर
मन का बहुत तेज गति वाला होना एक वरदान है।
वैराग्य क्या है? इसका अभ्यास से क्या सम्बन्ध है?