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तृतीय समुल्लास

  अथ तृतीयसमुल्लासारम्भः विषय : ब्रह्मचर्य, पठन-पाठन व्यवस्था           …. आठ वर्ष के हों तभी, लड़कों को लड़कों की और लड़कियों को लड़कियों की शाला में भेज देवें। जो अध्यापक पुरुष वा स्त्री दुष्टाचारी हों, उनसे शिक्षा न दिलावें, किन्तु जो पूर्ण विद्यायुक्त धार्मिक हों, वे ही पढ़ाने और [...]

तृतीय समुल्लास2023-08-22T14:32:19+00:00

द्वितीय समुल्लास

अथ द्वितीयसमुल्लासारम्भः विषय : संतानों की शिक्षा जैसी यह पृथिवी जड़ है, वैसे ही सूर्यादि लोक हैं। वे ताप और प्रकाशादि से भिन्न कुछ भी नहीं कर सकते। क्या ये चेतन हैं, जो क्रोधित हो के दुख और शान्त हो के सुख दे सकें? प्रश्न - क्या जो [...]

द्वितीय समुल्लास2023-08-06T14:53:26+00:00

प्रथम समुल्लास

अथ प्रथमसमुल्लासारम्भः विषय : ईश्वर के ओङ्कार आदि नामों की व्याख्या   जो यह ओङ्कार शब्द है, वह परमात्मा का सर्वोत्तम नाम है, क्योंकि इसमें जो अ, उ और म तीन अक्षर हैं वे मिल के एक 'ओम' समुदाय हुआ है। इस से परमेश्वर के बहुत नाम आते [...]

प्रथम समुल्लास2023-08-06T14:57:23+00:00

भूमिका

भूमिका --- मेरा इस ग्रंथ के बनाने का प्रयोजन सत्य अर्थ का प्रकाश करना है, अर्थात जो सत्य है उसको सत्य और जो मिथ्या है उसको मिथ्या ही प्रतिपादित करना, सत्य अर्थ का प्रकाश समझा है। वह सत्य नहीं कहाता, जो सत्य के स्थान में असत्य और असत्य के स्थान [...]

भूमिका2022-03-23T07:28:35+00:00

संक्षेप में, सनातन धर्म अर्थात वैदिक धर्म क्या है?

संक्षेप में, सनातन धर्म अर्थात वैदिक धर्म क्या है?  वैदिक धर्म को ही सनातन धर्म भी कहा जाता है। 'सनातन' का अर्थ होता है- ऐसी चीज, जो समय अथवा स्थान के परिवर्तन के साथ नहीं बदलती। उदाहरण के लिए, 'हमें कभी किसी के साथ अन्याय नहीं करना चाहिए' एक [...]

संक्षेप में, सनातन धर्म अर्थात वैदिक धर्म क्या है?2022-10-28T14:31:47+00:00

VEDIC DHARMA

VEDIC DHARMA Vedic Dharma is called Sanaatan Dharma. ‘Sanaatan’ means a thing, which never changes because of change in time or place. For example, ‘we should never do injustice with anyone’ is a value, which remains true in every time and place. As all the animals are given the [...]

VEDIC DHARMA2022-03-02T15:26:03+00:00

वैदिक संस्कृति

वैदिक संस्कृति 'संस्कृति' का अर्थ आज 'संस्कृति' शब्द का अर्थ बहुत अस्पष्ट है और इसका बहुत दुरुपयोग किया गया है। अलग-अलग लोग इस शब्द के अलग-अलग अर्थ लेते हैं। सभी राष्ट्र मानते हैं कि उनकी अपनी संस्कृतियां हैं, लेकिन ये संस्कृतियां इंसानों के पाशविक नृत्य को रोकने में विफल [...]

वैदिक संस्कृति2022-02-06T11:10:19+00:00

गीता को अधिक अच्छे से समझने के लिए मौलिक जानकारियां

गीता को अधिक अच्छे से समझने के लिए मौलिक जानकारियां गीता को अधिक अच्छे से समझने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण बिंदुओं को जानने से पहले, हमें इस धर्मोपदेश की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जान लेना चाहिए। यह उपदेश, जिसे भगवद्गीता के नाम से जाना जाता है, आर्यवर्त्त देश [...]

गीता को अधिक अच्छे से समझने के लिए मौलिक जानकारियां2022-01-24T15:10:26+00:00

श्रीमद्भगवद्गीता की कुछ अवधारणाओं का स्पष्टीकरण

श्रीमद्भगवद्गीता की कुछ अवधारणाओं का स्पष्टीकरण 'मृत्यु' और 'हत्या' शब्दों की विवेचना क्षत्रिय, समाज के उस वर्ग को कहा जाता है, जिनका कर्तव्य दूसरों के अधिकारों की रक्षा करना होता है। हर क्षत्रिय को युद्ध में धर्म की ओर से भाग लेना ही चाहिए। धर्मयुद्ध में मरना और मारना [...]

श्रीमद्भगवद्गीता की कुछ अवधारणाओं का स्पष्टीकरण2023-12-17T11:00:11+00:00

ईशा-उपनिषद

ईशा-उपनिषद -अधिकांश विचार: पंडित गंगाप्रसाद उपाध्याय  सबसे पहले, आइए जानते हैं कि उपनिषद क्या हैं। उपनिषद वैदिक विद्वानों द्वारा अपने शिष्यों को दी गई वेद की ऋचाओं की व्याख्याएं हैं। उपनिषदों में वर्णित व्याख्याएं अनुभवात्मक होती हैं। इन पुस्तकों की लोकप्रियता को देखते हुए आधुनिक काल में उपनिषद नाम [...]

ईशा-उपनिषद2024-01-28T14:09:29+00:00
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