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श्रीमद्भगवद्गीता की कुछ अवधारणाओं का स्पष्टीकरण

श्रीमद्भगवद्गीता की कुछ अवधारणाओं का स्पष्टीकरण 'मृत्यु' और 'हत्या' शब्दों की विवेचना क्षत्रिय, समाज के उस वर्ग को कहा जाता है, जिनका कर्तव्य दूसरों के अधिकारों की रक्षा करना होता है। हर क्षत्रिय को युद्ध में धर्म की ओर से भाग लेना ही चाहिए। धर्मयुद्ध में मरना और मारना [...]

श्रीमद्भगवद्गीता की कुछ अवधारणाओं का स्पष्टीकरण2023-12-17T11:00:11+00:00

ईशा-उपनिषद

ईशा-उपनिषद -अधिकांश विचार: पंडित गंगाप्रसाद उपाध्याय  सबसे पहले, आइए जानते हैं कि उपनिषद क्या हैं। उपनिषद वैदिक विद्वानों द्वारा अपने शिष्यों को दी गई वेद की ऋचाओं की व्याख्याएं हैं। उपनिषदों में वर्णित व्याख्याएं अनुभवात्मक होती हैं। इन पुस्तकों की लोकप्रियता को देखते हुए आधुनिक काल में उपनिषद नाम [...]

ईशा-उपनिषद2026-07-04T11:33:21+00:00

गुरु

गुरु ऐसा माना जाता है कि ईश्वर की ओर बढ़ने के लिए गुरु का होना आवश्यक है। लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके द्वारा केवल वही व्यक्ति, जिसने स्वयं ईश्वर को जान लिया है, गुरु हो सकता है। गुरु बनने के लिए न तो किसी विशिष्ट योग्यता [...]

गुरु2022-11-03T16:10:56+00:00

वास्तविक पूजा क्या है

वास्तविक पूजा क्या है और वास्तविक पूजा करने की विधि क्या है? देवताओं की पूजा और ईश्वर की पूजा में क्या अंतर है?   पूजा से क्या तात्पर्य है? वास्तविक पूजा को समझने से पहले, बेहतर होगा कि हम आज के व्यक्तियों द्वारा 'पूजा' शब्द से लिया जाने वाला [...]

वास्तविक पूजा क्या है2022-11-03T16:07:38+00:00

सामान्य ज्ञान (बुनियादी)

    सामान्य ज्ञान (बुनियादी) - आइए, एक हैरान करने वाली बात जानते हैं। भौतिक विज्ञान से संबंधित विषय पर हर कोई भौतिक-विज्ञानी के दृष्टिकोण को सुनना पसंद करेगा, इसी प्रकार खगोल विज्ञान से संबंधित विषय पर, हर कोई एक खगोलशास्त्री के विचार को सुनना पसंद करेगा और उनके [...]

सामान्य ज्ञान (बुनियादी)2025-10-30T15:31:02+00:00

विवेक और उसमें बढ़ोतरी

विवेक और उसमें बढ़ोतरी   - हमारी बुद्धि अथवा हमारे मस्तिष्क की जज करने की क्षमता को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है। हमारे कर्म हमारे वर्तमान विवेक के अनुरूप होने चाहिएं न कि अन्य व्यक्तियों के विवेक के अनुरूप, भले ही उस दूसरे व्यक्ति का विवेक [...]

विवेक और उसमें बढ़ोतरी2021-11-06T13:25:15+00:00

साधना

साधना   - अपने जीवन के अन्तिम लक्ष्य मोक्ष को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्यों को करने के लिए अपने मन को साधने को 'साधना' कहा जाता है। मोक्ष को प्राप्त करने का एक ही तरीका है- अष्टांग योग। हम सभी को 'साधना' के तत्वों, उसके उद्देश्य, [...]

साधना2024-03-04T15:50:16+00:00

धर्म?

  धर्म 'आम लोग धर्म को सत्य, बुद्धिमान लोग असत्य और शासक लोग उपयोगी मानते हैं।' - सेनेका-रोमन का एक उद्धरण 'अगर एक व्यक्ति भ्रम में है, तो उसे पागलपन कहते हैं। लाखों व्यक्ति अगर भ्रम में हैं, तो उसे धर्म कहते हैं' -डॉकिंस का एक उद्धरण 'विज्ञान धर्म [...]

धर्म?2023-03-04T10:53:33+00:00

ज्ञान

ज्ञान -ज्ञान के दो भाग हैं। एक सैद्धांतिक ज्ञान और दूसरा व्यावहारिक ज्ञान। सैद्धांतिक ज्ञान के मौलिकरूप को लगभग 100-150 पृष्ठों में समेटा जा सकता है। 'हम सभी को सच बोलना चाहिए'--यह आध्यात्मिक नियमों के सिद्धांतों में से एक है। इसे बहुत ही कम समय में सीखा जा [...]

ज्ञान2022-11-03T15:47:03+00:00

ज्ञान मार्ग, कर्म मार्ग और भक्ति मार्ग क्या हैं?

ज्ञान मार्ग, कर्म मार्ग और भक्ति मार्ग क्या हैं?   -ज्ञान मार्ग, कर्म मार्ग और भक्ति मार्ग में, इनमें से किसी का भी अभाव नहीं होता। ज्ञान मार्ग में ज्ञान को प्राथमिकता दी जाती है। ज्ञान मार्ग में कर्म और भक्ति भी मौजूद तो होते हैं, परन्तु केवल [...]

ज्ञान मार्ग, कर्म मार्ग और भक्ति मार्ग क्या हैं?2021-11-06T12:16:11+00:00
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