परमात्मा जिसे चाहेगा, उसे अपना स्वरूप प्रकट करेगा
शंका १:– कठोपनिषद (२//२२) का वचन है- नायमात्मा–से–तनूं स्वाम्। यह आत्मा न प्रवचन से, न मेधा बुद्धि से, न सत्संग से प्राप्त करने योग्य हैं, जिसको यह आत्मा (परमात्मा) स्वयं स्वीकार करता है, उसी को यह प्राप्त होता है, उसी को यह अपना स्वरूप प्रकट करता हैं। यहाँ [...]