देवयज्ञः
अथ द्वितीयोऽग्निहोत्रो देवयज्ञः प्रोच्यते उसका आचरण इस प्रकार से करना चाहिए कि सन्ध्योपासन करने के पश्चात् अग्निहोत्र का समय है। उसके लिए सोना, चांदी, तांबा, लोहा वा मिट्टी का कुण्ड बनवा लेना चाहिए। जिसका परिमाण सोलह अंगुल गहरा और तला चार अंगुल का लम्बा चौड़ा रहे। एक [...]