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जीवात्मा भविष्य में जो विचार करेंगें, उसका ज्ञान ईश्वर को पहले से हो सकता है या नहीं?

शंका ४ –जीवात्मा भविष्य में जो विचार करेंगें, उसका ज्ञान ईश्वर को पहले से हो सकता है या नहीं? समाधान- यह तो ईश्वर को पता है कि चुपचाप खाली तो कोई जीवात्मा बैठता नहीं, भविष्य में वह कुछ तो विचार करेगा। किस-किस तरह के विचार जीवात्मा कर सकते हैं, [...]

जीवात्मा भविष्य में जो विचार करेंगें, उसका ज्ञान ईश्वर को पहले से हो सकता है या नहीं?2023-09-07T11:55:50+00:00

क्या कोई हमारा भविष्यफल बता सकता है?

शंका ३ – क्या कोई हमारा भविष्यफल बता सकता है? समाधान- गणित में नियम हैः- संभावना का नियम अर्थात् लॅा आफ प्राबेबिलिटि- ये ज्योतिषी जितनी भी भविष्यवाणियाँ करते हैं, वे सभी लॅा आफ प्राबेबिलिट पर आधारित हैं। लॅा आफ प्राबेबिलिटि आप भी जानते हैं, हम भी जानते हैं, फिर उसने (ज्योतिषी [...]

क्या कोई हमारा भविष्यफल बता सकता है?2023-09-07T11:52:33+00:00

क्या व्यक्ति को बुरे कर्म करने के पश्चात अन्य सभी योनियों को भोगना पड़ेगा अथवा कुछ योनियों के पश्चात् वापस मानव जन्म मिलेगा?

समाधान– उत्तर हैः- एक व्यक्ति ने 20 हजार रुपये की चोरी की, दूसरे व्यक्ति ने दो अरब रुपये की चोरी की। वस्तुतः चोरी दोनों ने की, इसलिए दोनों अपराधी हैं। निःसन्देह दोनों को दण्ड मिलेगा। क्या दण्ड की मात्रा दोनों की समान रहेगी, या कम-अधिक? दण्ड की मात्रा कम-अधिक होगी। यदि [...]

क्या व्यक्ति को बुरे कर्म करने के पश्चात अन्य सभी योनियों को भोगना पड़ेगा अथवा कुछ योनियों के पश्चात् वापस मानव जन्म मिलेगा?2023-09-07T10:31:15+00:00

यदि चोर होंगे तो चोरी की प्रवृत्ति हमें पुनः चोरी करने की प्रेरणा देगी आदि।

शंका १ – अधिकांश लोगों का विचार है कि हम कर्म करने में स्वतन्त्र नहीं हैं। हम तो अपने प्रारब्ध-पूर्व जन्म के कर्मों से बन्धे हुए हैं। पूर्व जन्म के कर्म का अभ्यास हमें वैसे ही कर्म करने की प्रेरणा देता है जैसे हम कर्म करते आ रहे हैं। यदि चोर [...]

यदि चोर होंगे तो चोरी की प्रवृत्ति हमें पुनः चोरी करने की प्रेरणा देगी आदि।2023-09-07T11:54:13+00:00

अब

अब आशा है कि इतना पढ़ने अथवा सुनने के पश्चात साईट के आरम्भ में कही गई लोगों में प्रचलित अवधारणाओं का बौद्धिक उत्तर प्राप्त हो गया होगा। फिर भी उनके उत्तर संक्षेप से नीचे दिए जा रहे है- अवधारणा- सभी धर्म एक समान हैं। उत्तर- धर्म अनेक नहीं एक ही [...]

अब2023-03-10T10:54:35+00:00

‘पंडित’ और ‘ब्राह्मण’ में क्या भेद है?

सामान्यता पंडित' और 'ब्राह्मण' शब्दों को पर्यायवाची माना जाता है, परन्तु इनमें भेद होता है। हर 'ब्राह्मण' तो 'पंडित' होता है, परन्तु, हर 'पंडित' 'ब्राह्मण' नहीं होता। 'पंडित' वह व्यक्ति होता है, जो तीक्ष्ण बुद्धि वाला, किसी विद्या का जानकार और धार्मिक होता है, परन्तु किसी व्यक्ति को 'ब्राह्मण' तभी [...]

‘पंडित’ और ‘ब्राह्मण’ में क्या भेद है?2023-03-05T15:44:37+00:00

हवन के मंत्र व उनके अर्थ

हवन के मंत्र व उनके अर्थ देव-यज्ञ के आरम्भ में आठ ईश्वरस्तुतिप्रार्थनोपासना के मंत्रों को पढ़ने का विधान है। इन मंत्रों के अर्थ नीचे दिए हैं। ईश्वरस्तुतिप्रार्थनोपासना के मंत्रों के अर्थ (यहाँ शीर्षक में स्तुति, प्रार्थना और उपासना का क्रम व्याकरण की दृष्टि से है- स्तुति शब्द में [...]

हवन के मंत्र व उनके अर्थ2026-04-10T11:52:04+00:00

संध्या के मंत्र व उनके अर्थ

संध्या के मंत्र व उनके अर्थ सन्ध्या, हवन और अन्य अवसरों पर बोले जाने वाले मंत्रों का साधारणतया भावार्थ विचारना पर्याप्त माना जाता है, परन्तु मंत्रों के भिन्न भिन्न पदों के अर्थों को बार-बार विचारने अथवा स्मरण करने से एक तो उस कर्म के प्रति, जिनमें उन मंत्रों का [...]

संध्या के मंत्र व उनके अर्थ2026-04-05T11:49:52+00:00

संध्या के मंत्र व उनके अर्थ

संध्या के मंत्र व उनके अर्थ शिखा-बन्धन का मंत्र ओ३म भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात ।। अर्थ -हे सर्वरक्षक परमेश्वर! आप प्राणों के प्राण, अर्थात सबको जीवन देने वाले, सब दुखों से छुड़ानेवाले, स्वयं सुखस्वरूप और अपने उपासकों को सुखों की प्राप्ति कराने वाले हैं। [...]

संध्या के मंत्र व उनके अर्थ2023-01-25T11:49:35+00:00

सत्यार्थ प्रकाश पढ़ने की विधा

पुस्तक- सत्यार्थ प्रकाश पढ़ने की विधा मूलतः यह पुस्तक हिन्दी अर्थात आर्य-भाषा में लिखी गई है। इसकी अंग्रेजी translation 'Light of Truth'  के नाम से उपलब्ध है। क्योंकि, हमें इस तरह के साहित्य को पढ़ने की आदत नहीं होती, इसलिए, इस पुस्तक को पढ़ने की एक खास विधा [...]

सत्यार्थ प्रकाश पढ़ने की विधा2023-02-12T14:42:10+00:00
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