प्रार्थना के मायने
प्रार्थना के मायने -'प्रार्थना' हमारे जीवन में महत्त्वपूर्णभूमिका निभाती है। समाज में, इसके बारे में बहुत सी गलत धारणाएं घर कर गई हुई हैं। इसलिए, यह अति-आवश्यक हो जाता है कि इसके सही प्रारूप को [...]
प्रार्थना के मायने -'प्रार्थना' हमारे जीवन में महत्त्वपूर्णभूमिका निभाती है। समाज में, इसके बारे में बहुत सी गलत धारणाएं घर कर गई हुई हैं। इसलिए, यह अति-आवश्यक हो जाता है कि इसके सही प्रारूप को [...]
मानव का अंतिम लक्ष्य-मोक्ष - मोक्ष प्राप्त करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और यह उपलब्धि केवल मनुष्य ही प्राप्त कर सकता है। मोक्ष प्राप्त करने की विधि किसी भी अन्य संस्कृति में नहीं मिलती। यह हमारा दुर्भाग्य ही है कि हम इतनी बड़ी धरोहर अपने पास होते [...]
सृष्टि बनाने का प्रयोजन -ठीक है कि यह सृष्टि बनाकर ईश्वर ने अपने ज्ञान को अभिव्यक्त किया है। परन्तु क्या सृष्टि बनाने के प्रयोजन को इसी में समेट सकते हैं? जब हम जान चुके हैं कि ईश्वर का हर कार्य अपने लिए न होकर दूसरों के लिए ही [...]
ईश्वर -सत्य की राह पर चलने के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण पग है कि जो चीज जैसी है, उसको वैसी ही स्वीकार करें और उस चीज का अपने जीवन के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए [...]
हमारी संस्कृति का आधार- वेद निम्नलिखित कारणों से वेद को ईश्वरीय ज्ञान माना जाता है: हमारे आचार्यों को ज्ञान उनके आचार्यों से मिला, हमारे आचार्यों के आचार्यों को ज्ञान उनके आचार्यों से मिला। ऐसे पीछे जाते जाएं, तो सृष्टि के प्रथम मनुष्य को ज्ञान देने वाला ईश्वर के अतिरिक्त [...]
सत्य और असत्य को जानने की परीक्षाएं -भूतकाल में हम विश्व गुरु थे। अगर वास्तव में सत्य हमारी उन्नति के लिए आवश्यक है, तो हमारे पूर्वज अवश्य ही सत्य को अपनाने वाले रहे होंगे। तो क्या सत्य को मानने व जानने के लिए कोई तरीके हमारे पूर्वजों ने [...]
हमारे पूर्वज व हमारी संस्कृति की पश्चिमी संस्कृति से श्रेष्ठता पूर्वज-आजकल की परिस्थितियां कुछ ऐसी बन गई हैं कि हम सत्य न जानने के कारण अपने पूर्वजों पर किए जाने वाले आक्षेपों का यथोचित उत्तर नहीं दे पाते। यह तब तक नहीं हो सकता जब तक हमें अपने पूर्वजों [...]
सत्य और असत्य में भेद करने का हमारा सबसे महत्त्वपूर्ण साधन- बुद्धि -सत्य को मानने व जानने से पहले हमें कुछ तैयारी करने की आवश्यकता है। हमें अपनी कुछ कुछ विषयों से संबन्धित धारणाओं व मान्यताओं को संशोधित करना होगा। यह ठीक वैसा ही है, जैसे साफ साफ देखने [...]
केवल यह कह देना की सत्य को अपनाने से हमारी उन्नति होती है, प्रयाप्त नहीं है। क्योंकि, हम जो भी करते हैं, वो उसके लाभों से प्रेरित होकर ही करते हैं। इसलिए, सत्य अपनाने के लाभों का ओर अधिक स्पष्टता से कथन होना चाहिए। सत्य को अपनाने के लाभ मान लीजिए, आप बी. ए. के छात्र हैं और एक चौथी कक्षा का विद्यार्थी दो गुना दो कितने होते हैं, जानने के लिए आपके पास आता है, उत्तर [...]
आज की व्यवस्थाएं मौलिक विषयों के अंतिम सत्य को जानने से पहले अच्छा होगा कि हम आज की व्यवस्थाओं के सत्य को पहचान लें। -आज शिक्षा न्याय, भेषज (medicine) आदि से संबद्ध कोई भी व्यवस्था हमारी अपनी संस्कृति के अनुरूप नहीं है, बल्कि, ये सभी व्यवस्थाएं अंग्रेजी तंत्र [...]