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प्रमाण

प्रमाण - किसी चीज की सत्यता को जानने के लिए जो तरीके  प्रयोग में लाए जाते हैं, उन्हें प्रमाण कहा जाता है। हमारे ऋषियों के अतिरिक्त, किसी अन्य संस्कृति के विद्वानों का इस विषय पर कोई लेख नहीं मिलता। प्रमाण चार हैं-प्रत्यक्ष, अनुमान, शब्द और उपमान। पहले हम प्रत्यक्ष प्रमाण के बारे में जानते हैं। जब हमें [...]

प्रमाण2021-06-10T07:14:15+00:00

ज्योतिष

ज्योतिष -इस ब्रह्माण्ड में जितने भी पिण्ड हैं, चाहे वे स्वत: प्रकाशित हों अथवा अन्य से प्रकाशित हों, सब ज्योति कहलाते हैं। ज्योतियों के विषय से संबन्धित शास्त्र ज्योतिष कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र के अन्तर्गत बीजगणित, अंकगणित, भूगोल, खगोल और भूगर्भ विद्या आती है। ज्योतिष एक विज्ञान होने [...]

ज्योतिष2021-06-10T07:09:51+00:00

भाग्य

-भाग्य ओर कुछ नहीं, बल्कि हमारे पिछले कर्मों का ही परिणाम है। क्योंकि, हमारे कर्म हमारे व्यक्तित्व पर निर्भर करते हैं, इसलिए यह कहा जा सकता है कि जैसा हमारा आज का व्यक्तित्व है, वैसा ही हमारा कल का भाग्य होगा। किसी के वर्तमान के कर्मों को देख [...]

भाग्य2021-06-10T07:08:45+00:00

विद्वता व धार्मिकता

विद्वता व धार्मिकता -हर व्यक्ति शास्त्रों का विद्वान् नहीं हो सकता, परन्तु हर व्यक्ति को धार्मिक होना ही चाहिए। यहां, धार्मिक होने का अर्थ है-मधुर व हितकर बोलना, सत्य का आग्रही होना, अपना हर कर्म दूसरों के हित के लिए करना, कभी भी किसी के साथ भी अन्याय न करना, निरंतर अपनी [...]

विद्वता व धार्मिकता2021-06-10T07:05:48+00:00

आर्य कौन

आर्य कौन -'आर्य' शब्द का अर्थ होता है श्रेष्ठ। हमारे पूर्वज 'मानवता' को जीते थे, इसलिए श्रेष्ठ कहलाते थे। हमारे किसी भी पुराने साहित्य में 'आर्य' के अतिरिक्त ओर कोई भी सम्बोधन नहीं मिलता। हम 'आर्यों' की सन्तान हैं। परन्तु, क्या श्रेष्ठता से संबंधित कुछ मौलिक जानकारियां प्राप्त [...]

आर्य कौन2021-06-10T07:04:45+00:00

क्या देवता 33 करोड़ हैं?

क्या देवता 33 करोड़ हैं? -देवता दिव्य गुणों से युक्त होने वालों को कहा जाता है। यह भ्रान्ति है कि वेदों में अनेक देवताओं का वर्णन है। कुछ देवता जड़ होते हैं और कुछ चेतन। तथाकथित सनातन धर्मियों के अनुसार देवता 33 करोड़ हैं, जबकि वास्तव में देवता [...]

क्या देवता 33 करोड़ हैं?2021-06-10T07:03:35+00:00

हवन की महत्ता

हवन की महत्ता -मनुष्य को स्वस्थ और सुखी रहने के लिए जल और वायु की स्वच्छता परम आवश्यक है। आज संसार में, जल और वायु की अशुद्धि एक बड़ी भारी समस्या बनी हुई है। वैदिक संस्कृति में हवन इस समस्या का सर्वोत्तम समाधान है।  -वेदों और धर्म शास्त्र [...]

हवन की महत्ता2021-06-10T07:01:06+00:00

सन्ध्या की महत्ता

सन्ध्या की महत्ता -  यहाँ सन्ध्या का अर्थ सायंकाल नहीं है, सन्ध्या का अर्थ है-सम+ध्या अर्थात अच्छी प्रकार ईश्वर का ध्यान करना। ईश्वर के चिन्तन के लिए वेद व कुछ वेदानुकूल ग्रन्थों के मंत्र छांट लिए गए हैं। इन मन्त्रों में हमारे शरीरिक बल, ज्ञान व कर्मों की उच्चता के [...]

सन्ध्या की महत्ता2021-06-10T07:00:03+00:00

धन का महत्त्व

धन का महत्त्व -धन का महत्त्व इसी बात से सिद्ध होता है कि धन के बगैर हम तकरीबन सभी धार्मिक कार्यों को नहीं कर सकते। हमारी संस्कृति में धन के अभाव को बहुत बड़ा अभिशाप माना जाता है। जहाँ यह सत्य है, कि तकरीबन सभी दूसरों की भलाई के [...]

धन का महत्त्व2021-06-10T06:58:27+00:00

योग से सम्बन्धित कुछ विषय

                       योग से सम्बन्धित कुछ विषय - अब हम योग के स्थूल स्वरूप को व योग से सम्बन्धित कुछ विषयों को जानेंगे।  जब योग शब्द का प्रयोग आध्यात्मिक पृष्ठभूमि में किया जाता है तब उसका अर्थ आत्मा को परमात्मा [...]

योग से सम्बन्धित कुछ विषय2021-06-10T05:46:29+00:00
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