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सत्य और असत्य में भेद करने

सत्य और असत्य में भेद करने का हमारा सबसे महत्त्वपूर्ण साधन- बुद्धि -सत्य को मानने व जानने से पहले हमें कुछ तैयारी करने की आवश्यकता है। हमें अपनी कुछ कुछ विषयों से संबन्धित धारणाओं व मान्यताओं को संशोधित करना होगा।  यह ठीक वैसा ही है, जैसे साफ साफ देखने [...]

सत्य और असत्य में भेद करने2021-06-07T14:56:14+00:00

सत्य को अपनाने के लाभ

केवल यह कह देना की सत्य को अपनाने से हमारी उन्नति होती है, प्रयाप्त नहीं है।  क्योंकि, हम जो भी करते हैं, वो उसके लाभों से प्रेरित होकर ही करते हैं। इसलिए, सत्य अपनाने के लाभों का ओर अधिक स्पष्टता से कथन होना चाहिए।   सत्य को अपनाने के लाभ मान लीजिए, आप बी. ए. के छात्र हैं और एक चौथी कक्षा का विद्यार्थी दो गुना दो कितने होते हैं, जानने के लिए आपके पास आता है, उत्तर [...]

सत्य को अपनाने के लाभ2021-06-09T13:51:00+00:00

आज की व्यवस्थाएं

  आज की व्यवस्थाएं मौलिक विषयों के अंतिम सत्य को जानने से पहले अच्छा होगा कि हम आज की व्यवस्थाओं के सत्य को पहचान लें। -आज शिक्षा न्याय, भेषज (medicine) आदि से संबद्ध कोई भी व्यवस्था हमारी अपनी संस्कृति के अनुरूप नहीं है, बल्कि, ये सभी व्यवस्थाएं अंग्रेजी तंत्र [...]

आज की व्यवस्थाएं2021-06-07T14:37:28+00:00

बुनियादी मान्यताओं के संशोधनार्थ कुछ सत्य

                               बुनियादी मान्यताओं के संशोधनार्थ कुछ सत्य सत्य के अपनाने के अतिरिक्त हमारी उन्नति का अन्य कोई मार्ग नहीं है। लेकिन, हममें घर की हुई मान्यताओं में से सही और गलत का निर्णय करने से पहले, कुछ मौलिक जानकारियों का हमारे पास होना बहुत जरूरी है। यहां [...]

बुनियादी मान्यताओं के संशोधनार्थ कुछ सत्य2021-06-09T13:44:15+00:00

कर्मों का फल

प्रश्न - कर्मों का फल कौन देता है? उत्तर- जीवों द्वारा किए गए कर्मों का मुख्य फलदाता सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, परमपिता परमात्मा ही है। किन्तु, मनुष्यों के कर्मों का फल केवल ईश्वर ही देता है, ऐसा नहीं है। बाल्य काल में बच्चों को उनके द्वारा किए गए अच्छे [...]

कर्मों का फल2024-11-09T06:41:19+00:00

कभी किसी का प्राण झूठ बोलने से बचता हो, तो भी नहीं बचाना चाहिए?

प्रश्न - कभी किसी का प्राण झूठ बोलने से बचता हो, तो भी नहीं बचाना चाहिए? उत्तर- हमेशा सत्य के आश्रय से ही किसी का प्राण बचाना चाहिए। यदि कोई किसी के प्राण बचाने हेतू झूठ बोलता है, तो प्राण बच जायेगा। किन्तु, उस झूठ का फल पाप [...]

कभी किसी का प्राण झूठ बोलने से बचता हो, तो भी नहीं बचाना चाहिए?2024-11-17T12:25:43+00:00

समाज में ऐसा सिद्धान्त प्रचलित है कि जो कुछ सृष्टि

प्रश्न - समाज में ऐसा सिद्धान्त प्रचलित है कि जो कुछ सृष्टि में हो रहा है, वह ईश्वर की इच्छा से, ईश्वर की प्रेरणा से, ईश्वर के द्वारा ही हो रहा है। जीवात्मा तो एक साधन मात्र है, क्या यह सिद्धान्त सत्य है? उत्तर- नहीं, ऐसा मानना ठीक [...]

समाज में ऐसा सिद्धान्त प्रचलित है कि जो कुछ सृष्टि2024-11-17T12:32:05+00:00

आजकल प्रतिदिन हजारों की संख्या में गर्भ में ही

प्रश्न - आजकल प्रतिदिन हजारों की संख्या में गर्भ में ही उत्पन्न होने वाले शिशुओं को मारा जा रहा है तो क्या यह गर्भ में आने वाले जीव के कर्मों का फल है या माता-पिता का? उत्तर-गर्भ का धारण माता-पिता की इच्छा से होता है और गर्भपात भी [...]

आजकल प्रतिदिन हजारों की संख्या में गर्भ में ही2021-05-16T08:03:15+00:00

लोक में तो देखते हैं कि स्वामी सेठ अपने सेवकों का

प्रश्न ६३. - लोक में तो देखते हैं कि स्वामी सेठ अपने सेवकों का जितना पारिश्रमिक होता है उससे कम या अधिक दे देता है। इसी प्रकार ईश्वर भी किसी को अपनी ओर से बिना ही कर्म के सुख-दुख दे देगा। उत्तर- लोक में बिना ही कर्मों के [...]

लोक में तो देखते हैं कि स्वामी सेठ अपने सेवकों का2024-11-17T12:29:09+00:00

वे कौन सी परिस्थितियाँ है जिनमें झूठ बोलना पुण्य हो सकता है?

प्रश्न - वे कौन सी परिस्थितियाँ हैं, जिनमें झूठ बोलना पुण्य हो सकता है? उत्तर- ऐसी कोई परिस्थिति नहीं है, जहाँ झूठ बोलना पुण्य हो सकता है। सर्वत्र अज्ञानता, विवशता, निर्बलता आदि कारण हो सकते हैं, जिससे व्यक्ति झूठ बोलने को बाधित होता है। अतः इन कारणों को [...]

वे कौन सी परिस्थितियाँ है जिनमें झूठ बोलना पुण्य हो सकता है?2024-11-17T12:26:58+00:00
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