मांस व अण्डा क्यों अभक्ष्य हैं?

 

बिना किसी प्राणी की हिंसा किए हमें मांस प्राप्त नहीं होता। सामान्यतः शाकाहारी पशुओं से ही मांस प्राप्त किया जाता है और लगभग 100 किलो शाक खाने पर ही एक किलो मांस बन पाता है। मनुष्य शरीर की रचना की दृष्टि से भी, मनुष्य को वनस्पतियां खाना ही उसके स्वास्थ्य के लिए उचित है। मनुष्यों द्वारा शाकाहार करना मांसाहार से बेहतर है, इसे एक तर्क से भी समझा जा सकता है। (कुछ बातों का निर्णय केवल तर्क से ही हो जाता है, प्रमाण की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।) शाकाहार के पक्ष में तर्क- मनुष्य 80 वर्ष तक शाक आदि खाकर बगैर बीमार हुए जी सकता है, परन्तु व्यक्ति केवल मांस खाकर इतने वर्ष तक स्वस्थ जीवन नहीं बिता सकता।

सभी बातों का समाधान केवल तर्क से नहीं होता। कुछ बातों के लिए प्रमाणों की सहायता लेनी ही पड़ती है। शाकाहार मांसाहार के सम्बन्ध में एक प्रश्न बहुत किया जाता है कि यदि, वनस्पतियों में और जिन जीवों से मांस प्राप्त किया जाता है, दोनों में आत्मा होती है, तो वनस्पतियों को खाने से हिंसा को क्यों न माना जाए? इस प्रश्न के उत्तर में, वेद के प्रमाणों को जानना आवश्यक हो जाता है। ईश्वर इस सृष्टि का नियंता है। वही निर्धारित करता है कि उसकी सृष्टि में किस प्राणी को क्या खाना चाहिए। ईश्वर की वाणी, वेद में अनेकों वचन मिलते हैं, जो मनुष्य को गेंहू, बाजरा, दूध, घी आदि खाने के लिए कहते हैं। ये वचन मनुष्यों को इन चीजों को खाने के प्रमाण के रूप में कहे जा सकते हैं। मनुष्य को जिन चीजों को खाने की इजाजत ईश्वर ने वेद में दे रखी है, उन में आत्मा है कि नहीं, इस बात के कोई मायने नहीं रह जाते। किस वस्तु में क्या चीज डालनी चाहिए, इस बात का निर्धारण उस वस्तु को बनाने वाला करता है, नाकि उस वस्तु का प्रयोग करने वाला, ठीक जैसे किसी कार में पैट्रोल डालना चाहिए या डीजल, इस बात का निर्धारण कार को प्रयोग करने वाला नहीं, बल्कि उस कार का निर्माता करता है। इसी तरह, संसार के सभी प्राणी ईश्वर की रचना हैं, तो उनके खाने-पीने के निर्धारण का अधिकार भी उसी ईश्वर का है।

मांस खाने वाला व्यक्ति भी हिंसा का उतना ही भागीदार होता है, जितना कि प्राणी को मारने, मांस बेचने, मांस खरीदने व मांस पकाने वाला व्यक्ति। क्योंकि अहिंसा धर्म का मूल तत्व है, इसलिए मांस खाने वाला व्यक्ति कभी भी धार्मिक नहीं हो सकता। सभी वैदिक विद्वान इस विषय पर एकमत हैं कि मनुष्य जाति के लिए अण्डा, मांस आदि अभक्ष्य और शाक-सब्जियां आदि भक्ष्य हैं।

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