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क्या कोई ऐसा भी कर्म हो सकता है, जिसके पीछे मनुष्य की कोई भी कामना (सांसारिक या मोक्ष की) न हो?

प्रश्न - क्या कोई ऐसा भी कर्म हो सकता है, जिसके पीछे मनुष्य की कोई भी कामना (सांसारिक या मोक्ष की) न हो? उत्तर- एक क्षण के लिए भी मनुष्य कर्म से रहित नहीं होता। मानसिक, वाचनिक या शारीरिक कोई न कोई कर्म सर्वदा करता ही रहता है। [...]

क्या कोई ऐसा भी कर्म हो सकता है, जिसके पीछे मनुष्य की कोई भी कामना (सांसारिक या मोक्ष की) न हो?2024-11-11T06:11:57+00:00

समाज में व देश में चोरी करने वाले, रिश्वत लेने वाले, मिलावट करने वाले, अधिक मुनाफा लेने वाले, झूठी गवाही, असत्य, छल-कपट आदि गलत कार्यों को करके धन, सम्पत्ति इक्ट्ठी करने व गलत कार्य करने वाले व्यक्ति सुखी दिखाई देते हैं। क्या ईश्वर उनको देखता नहीं है? दण्ड नहीं देता? जब ऐसे गलत कार्य करने वाले सुखी देखे जाते है तो धर्म, सदाचार, नैतिकता पर से लोगों का विश्वास ही हट जाता है और अन्य लोग भी ऐसे लोगों का अनुकरण करके उनकी तरह बुरे काम करने लग जाते है और इससे सारे समाज, राष्ट्र में भ्रष्टाचार फैल जाता है जो आज हम स्पष्ट देखते है।

प्रश्न - समाज में व देश में चोरी करने वाले, रिश्वत लेने वाले, मिलावट करने वाले, अधिक मुनाफा लेने वाले, झूठी गवाही, असत्य, छल-कपट आदि गलत कार्यों को करके धन, सम्पत्ति इक्ट्ठी करने व गलत कार्य करने वाले व्यक्ति सुखी दिखाई देते हैं। क्या ईश्वर उनको देखता नहीं [...]

समाज में व देश में चोरी करने वाले, रिश्वत लेने वाले, मिलावट करने वाले, अधिक मुनाफा लेने वाले, झूठी गवाही, असत्य, छल-कपट आदि गलत कार्यों को करके धन, सम्पत्ति इक्ट्ठी करने व गलत कार्य करने वाले व्यक्ति सुखी दिखाई देते हैं। क्या ईश्वर उनको देखता नहीं है? दण्ड नहीं देता? जब ऐसे गलत कार्य करने वाले सुखी देखे जाते है तो धर्म, सदाचार, नैतिकता पर से लोगों का विश्वास ही हट जाता है और अन्य लोग भी ऐसे लोगों का अनुकरण करके उनकी तरह बुरे काम करने लग जाते है और इससे सारे समाज, राष्ट्र में भ्रष्टाचार फैल जाता है जो आज हम स्पष्ट देखते है।2024-11-11T05:53:21+00:00

संसार में शुभ कर्म करने वाले दुःखी और अशुभ कर्म करने वाले सुखी क्यों दिखाई देते हैं?

प्रश्न - संसार में शुभ कर्म करने वाले दुखी और अशुभ कर्म करने वाले सुखी क्यों दिखाई देते हैं? उत्तर- यह धारणा नितान्त मिथ्या है कि सुकर्मी दुखी होते है तथा कुकर्मी सुखी होते हैं। बाहर से दुखी दिखाई देने वाला सुखी, प्रसन्न होता है और बाहर से [...]

संसार में शुभ कर्म करने वाले दुःखी और अशुभ कर्म करने वाले सुखी क्यों दिखाई देते हैं?2024-11-11T03:42:51+00:00

अच्छे कर्म करने वाले अर्थात् धार्मिक व्यक्ति पर बाधा कष्ट आते हैं? क्या यह उनके अच्छे कर्मों का फल है?

अच्छे कर्म करने वाले व्यक्ति को ईश्वर की तरफ से सदा सुख, शान्ति, प्रेम, सहयोग, उत्साह, प्रेरणा आदि ही मिलते हैं। इसमें किसी भी प्रकार का विकल्प नहीं है। किन्तु परिवार, समाज की ओर से कभी-कभी सुख, सहयोग, प्रेम, सान्त्वना के विपरीत भय, तिरस्कार, घृणा, उपेक्षा, विरोध, निन्दा, अन्याय आदि [...]

अच्छे कर्म करने वाले अर्थात् धार्मिक व्यक्ति पर बाधा कष्ट आते हैं? क्या यह उनके अच्छे कर्मों का फल है?2021-05-02T07:31:47+00:00

कर्म का फल कब मिलता है? कर्म करने के कितने समय पश्चात् फल मिलता है?

प्रश्न - कर्म का फल कब मिलता है? कर्म करने के कितने समय पश्चात् फल मिलता है? उत्तर- कर्मों का फल शीघ्र मिलता है और विलम्ब से भी। यह आवश्यक नहीं है कि कर्म करते ही फल तत्काल मिल जाए। कर्म का फल और उसके काल का निर्धारण [...]

कर्म का फल कब मिलता है? कर्म करने के कितने समय पश्चात् फल मिलता है?2024-11-11T03:32:38+00:00

प्रायश्चित क्या है ? क्या बुरे कर्मों के फल को नष्ट या कम किया जा सकता है ?

…. किये गये बुरे कर्मों के प्रति मन में ग्लानि, खिन्नता, दुख की अनुभूति करना तथा ऐसे कर्मों को भविष्य में न करने को दृढ़ प्रतिज्ञा करना प्रायश्चित कहलाता है। किसी बुरे कर्म के विषय में प्रायश्चित करने से उसके फल से हम बच नहीं सकते न उसमें किसी प्रकार [...]

प्रायश्चित क्या है ? क्या बुरे कर्मों के फल को नष्ट या कम किया जा सकता है ?2021-05-02T07:20:33+00:00

फल की परिभाषा क्या है?

प्रश्न - फल की परिभाषा क्या है? उत्तर- कर्म का फल भोग है, जो सुख-दुख रूपी अनुभूति वाला होता है। फल हमेशा कर्त्ता को ही मिलता है। सुख-दुख रूपी फल जीवात्मा शरीर, मन, इन्द्रिय तथा विषय से साथ जुड़कर ही प्राप्त करता है और फल भी इन्हीं के [...]

फल की परिभाषा क्या है?2024-11-10T12:09:22+00:00

कर्म का फल, कर्म का परिणाम तथा कर्म का प्रभाव क्या है ? इन तीनों में क्या भेद है ?

प्रायः सामान्य व्यक्ति सुख-दुख की प्राप्ति का कारण कर्मों का फल ही मान लेते हैं, जबकि वस्तु स्थिति यह है कि मनुष्य को कर्म के फल के रूप में तो सुख दुख आदि मिलते ही हैं। किन्तु, कर्म के परिणाम व प्रभाव के रूप में भी सुख दुख आदि की [...]

कर्म का फल, कर्म का परिणाम तथा कर्म का प्रभाव क्या है ? इन तीनों में क्या भेद है ?2021-05-01T12:12:38+00:00

क्या वेदादि शास्त्रों में बताये कर्मों को न करने पर दण्ड मिलता है?

प्रश्न - क्या वेदादि शास्त्रों में बताये कर्मों को न करने पर दण्ड मिलता है? उत्तर- इस विषय में ऐसा जानना चाहिये कि जो कर्म सामान्य रुप से सभी मनुष्यों के द्वारा अवश्य ही करने योग्य होते हैं, जिनको किए बिना मनुष्य का जीवन सुखी, शान्त, सन्तुष्ट नहीं [...]

क्या वेदादि शास्त्रों में बताये कर्मों को न करने पर दण्ड मिलता है?2024-11-10T07:28:57+00:00

क्या कर्म बिना फल दिये भी नष्ट हो सकते हैं?

प्रश्न - क्या कर्म बिना फल दिये भी नष्ट हो सकते हैं? उत्तर- नहीं, बिना फल दिये कर्म कभी भी नष्ट नहीं होते। जैसे हजारों गायों में बछड़ा अपनी माँ के पास ही जाता है, उसी प्रकार, जो किया हुआ कर्म है, अपने करने वाले के पीछे हो [...]

क्या कर्म बिना फल दिये भी नष्ट हो सकते हैं?2024-11-10T07:19:23+00:00
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