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कर्म का फल, कर्म का परिणाम तथा कर्म का प्रभाव क्या है ? इन तीनों में क्या भेद है ?

प्रायः सामान्य व्यक्ति सुख-दुख की प्राप्ति का कारण कर्मों का फल ही मान लेते हैं, जबकि वस्तु स्थिति यह है कि मनुष्य को कर्म के फल के रूप में तो सुख दुख आदि मिलते ही हैं। किन्तु, कर्म के परिणाम व प्रभाव के रूप में भी सुख दुख आदि की [...]

कर्म का फल, कर्म का परिणाम तथा कर्म का प्रभाव क्या है ? इन तीनों में क्या भेद है ?2021-05-01T12:12:38+00:00

क्या वेदादि शास्त्रों में बताये कर्मों को न करने पर दण्ड मिलता है?

प्रश्न - क्या वेदादि शास्त्रों में बताये कर्मों को न करने पर दण्ड मिलता है? उत्तर- इस विषय में ऐसा जानना चाहिये कि जो कर्म सामान्य रुप से सभी मनुष्यों के द्वारा अवश्य ही करने योग्य होते हैं, जिनको किए बिना मनुष्य का जीवन सुखी, शान्त, सन्तुष्ट नहीं [...]

क्या वेदादि शास्त्रों में बताये कर्मों को न करने पर दण्ड मिलता है?2024-11-10T07:28:57+00:00

क्या कर्म बिना फल दिये भी नष्ट हो सकते हैं?

प्रश्न - क्या कर्म बिना फल दिये भी नष्ट हो सकते हैं? उत्तर- नहीं, बिना फल दिये कर्म कभी भी नष्ट नहीं होते। जैसे हजारों गायों में बछड़ा अपनी माँ के पास ही जाता है, उसी प्रकार, जो किया हुआ कर्म है, अपने करने वाले के पीछे हो [...]

क्या कर्म बिना फल दिये भी नष्ट हो सकते हैं?2024-11-10T07:19:23+00:00

क्या ईश्वर मनुष्यों को अपनी इच्छा से, जैसा चाहता है, वैसा फल देता है?

प्रश्न - क्या ईश्वर मनुष्यों को अपनी इच्छा से, जैसा चाहता है, वैसा फल देता है? किसी को अच्छा तो किसी को बुरा, किसी को धनिक तो किसी को गरीब, किसी को रूपवान तो किसी को कुरूप, किसी को बुद्धिमान तो किसी को मूर्ख बना देता हैं? उत्तर- [...]

क्या ईश्वर मनुष्यों को अपनी इच्छा से, जैसा चाहता है, वैसा फल देता है?2024-11-11T05:42:54+00:00

क्या ईश्वर मनुष्यों को अच्छे बुरे कर्म करने की प्रेरणा देता है?

प्रश्न - क्या ईश्वर मनुष्यों को अच्छे बुरे कर्म करने की प्रेरणा देता है? उत्तर- ईश्वर जीव के कर्मों का, चाहे वह अच्छे हो या बुरे प्रेरक नहीं है। यदि ईश्वर मनुष्य के कर्मों का प्रेरक होता, तो अच्छे-बुरे कर्म का फल भी ईश्वर को ही मिलना चाहिये [...]

क्या ईश्वर मनुष्यों को अच्छे बुरे कर्म करने की प्रेरणा देता है?2024-11-10T07:08:54+00:00

कर्म करते समय फल की आशा क्यों न करें? इससे क्या हानि है?

प्रश्न - कर्म करते समय फल की आशा क्यों न करें? इससे क्या हानि है? उत्तर- कर्म को करते समय मन में फल की आशा इसलिए नहीं रखनी चाहिये, क्योंकि फल हमारी इच्छा के अनुकूल भी होता है और कभी प्रतिकूल भी होता है। यह आवश्यक नहीं कि [...]

कर्म करते समय फल की आशा क्यों न करें? इससे क्या हानि है?2024-11-10T07:03:43+00:00

क्या कोई अपने कर्मों का फल दूसरे को दे सकता है?

प्रश्न - क्या कोई अपने कर्मों का फल दूसरे को दे सकता है? उत्तर- अपने किये हुवे कर्मों का फल व्यक्ति को स्वयं ही भोगना पड़ता है। अपने कर्मों का फल कोई व्यक्ति किसी अन्य को नहीं दे सकता। एक आत्मा द्वारा किए गए पाप-पुण्य रूप धर्माधर्म का [...]

क्या कोई अपने कर्मों का फल दूसरे को दे सकता है?2024-11-09T06:59:45+00:00

कर्म करते समय फल की आशा क्यों न करें? इससे क्या हानि है?

कर्म को करते समय मन में फल की आशा इसलिए नहीं रखनी चाहिये क्योंकि फल हमारी इच्छा के अनुकूल भी होता है और कभी प्रतिकूल भी होता है। यह आवश्यक नहीं कि फल के विषय में हम जैसी इच्छा मन में रखते हैं फल प्राप्ति हमारे अनुकूल ही हो। फल [...]

कर्म करते समय फल की आशा क्यों न करें? इससे क्या हानि है?2021-05-01T11:24:17+00:00

क्या कोई अपने कर्मों का फल दूसरे को दे सकता है?

अपने किये हुवे कर्मों का फल व्यक्ति को स्वयं ही भोगना पड़ता है। अपने कर्मों का फल कोई व्यक्ति किसी अन्य को नहीं दे सकता। एक आत्मा द्वारा किए गए पाप-पुण्य रूप धर्माधर्म का फल दूसरी आत्मा को नहीं मिलता। वे गुण दूसरे के सुख-दुख के लिए कारण नहीं बनते। [...]

क्या कोई अपने कर्मों का फल दूसरे को दे सकता है?2021-05-01T11:18:37+00:00

मनुस्मृति में आठ प्रकार के घातक पापी बताये गये हैं

प्रश्न - मनुस्मृति में आठ प्रकार के घातक पापी बताये गये हैं- समर्थन करने वाला, काटने वाला, मारने वाला, खरीदने वाला, बेचने वाला, पकाने वाला, परोसने वाला तथा खाने वाला। इनमें सभी लोग बराबर पापी होते हैं या कम अधिक होते हैं? उत्तर- सामान्य रूप से माँस खाने [...]

मनुस्मृति में आठ प्रकार के घातक पापी बताये गये हैं2024-11-09T06:54:49+00:00
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