कर्मों का कर्त्ता कौन है?
शरीर में इच्छापूर्वक किये जाने वाले कर्मों का कर्त्ता स्वयं जीवात्मा ही होता है। यद्यपि कर्म करने या न करने से सम्बन्धित प्रेरणा, उत्साह, आदेश, अन्य व्यक्तियों से भी मिलते हैं जो कर्म करने या न करने में निमित्त बनते हैं, किन्तु मुख्य कर्त्ता तो स्वयं शरीर में बैठा अभिमानी जीवात्मा ही है, जिसकी [...]