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क्या ईश्वर मनुष्यों को अपनी इच्छा से, जैसा चाहता है, वैसा फल देता है?

प्रश्न - क्या ईश्वर मनुष्यों को अपनी इच्छा से, जैसा चाहता है, वैसा फल देता है? किसी को अच्छा तो किसी को बुरा, किसी को धनिक तो किसी को गरीब, किसी को रूपवान तो किसी को कुरूप, किसी को बुद्धिमान तो किसी को मूर्ख बना देता हैं? उत्तर- [...]

क्या ईश्वर मनुष्यों को अपनी इच्छा से, जैसा चाहता है, वैसा फल देता है?2024-11-11T05:42:54+00:00

क्या ईश्वर मनुष्यों को अच्छे बुरे कर्म करने की प्रेरणा देता है?

प्रश्न - क्या ईश्वर मनुष्यों को अच्छे बुरे कर्म करने की प्रेरणा देता है? उत्तर- ईश्वर जीव के कर्मों का, चाहे वह अच्छे हो या बुरे प्रेरक नहीं है। यदि ईश्वर मनुष्य के कर्मों का प्रेरक होता, तो अच्छे-बुरे कर्म का फल भी ईश्वर को ही मिलना चाहिये [...]

क्या ईश्वर मनुष्यों को अच्छे बुरे कर्म करने की प्रेरणा देता है?2024-11-10T07:08:54+00:00

कर्म करते समय फल की आशा क्यों न करें? इससे क्या हानि है?

प्रश्न - कर्म करते समय फल की आशा क्यों न करें? इससे क्या हानि है? उत्तर- कर्म को करते समय मन में फल की आशा इसलिए नहीं रखनी चाहिये, क्योंकि फल हमारी इच्छा के अनुकूल भी होता है और कभी प्रतिकूल भी होता है। यह आवश्यक नहीं कि [...]

कर्म करते समय फल की आशा क्यों न करें? इससे क्या हानि है?2024-11-10T07:03:43+00:00

क्या कोई अपने कर्मों का फल दूसरे को दे सकता है?

प्रश्न - क्या कोई अपने कर्मों का फल दूसरे को दे सकता है? उत्तर- अपने किये हुवे कर्मों का फल व्यक्ति को स्वयं ही भोगना पड़ता है। अपने कर्मों का फल कोई व्यक्ति किसी अन्य को नहीं दे सकता। एक आत्मा द्वारा किए गए पाप-पुण्य रूप धर्माधर्म का [...]

क्या कोई अपने कर्मों का फल दूसरे को दे सकता है?2024-11-09T06:59:45+00:00

कर्म करते समय फल की आशा क्यों न करें? इससे क्या हानि है?

कर्म को करते समय मन में फल की आशा इसलिए नहीं रखनी चाहिये क्योंकि फल हमारी इच्छा के अनुकूल भी होता है और कभी प्रतिकूल भी होता है। यह आवश्यक नहीं कि फल के विषय में हम जैसी इच्छा मन में रखते हैं फल प्राप्ति हमारे अनुकूल ही हो। फल [...]

कर्म करते समय फल की आशा क्यों न करें? इससे क्या हानि है?2021-05-01T11:24:17+00:00

क्या कोई अपने कर्मों का फल दूसरे को दे सकता है?

अपने किये हुवे कर्मों का फल व्यक्ति को स्वयं ही भोगना पड़ता है। अपने कर्मों का फल कोई व्यक्ति किसी अन्य को नहीं दे सकता। एक आत्मा द्वारा किए गए पाप-पुण्य रूप धर्माधर्म का फल दूसरी आत्मा को नहीं मिलता। वे गुण दूसरे के सुख-दुख के लिए कारण नहीं बनते। [...]

क्या कोई अपने कर्मों का फल दूसरे को दे सकता है?2021-05-01T11:18:37+00:00

मनुस्मृति में आठ प्रकार के घातक पापी बताये गये हैं

प्रश्न - मनुस्मृति में आठ प्रकार के घातक पापी बताये गये हैं- समर्थन करने वाला, काटने वाला, मारने वाला, खरीदने वाला, बेचने वाला, पकाने वाला, परोसने वाला तथा खाने वाला। इनमें सभी लोग बराबर पापी होते हैं या कम अधिक होते हैं? उत्तर- सामान्य रूप से माँस खाने [...]

मनुस्मृति में आठ प्रकार के घातक पापी बताये गये हैं2024-11-09T06:54:49+00:00

मानसिक वाचनिक शारीरिक इन तीन प्रकार के पाप कर्मों में अधिक दण्ड किसको मिलता है?

प्रश्न - मानसिक, वाचनिक, शारीरिक इन तीन प्रकार के पाप कर्मों में अधिक दण्ड किसको मिलता है? उत्तर- विशिष्ट परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य रूप से मानसिक पापों की अपेक्षा वाचनिक पापों का तथा वाचनिक पापों की अपेक्षा शारीरिक पापों का अधिक दण्ड मिलता है। इसका कारण यह है [...]

मानसिक वाचनिक शारीरिक इन तीन प्रकार के पाप कर्मों में अधिक दण्ड किसको मिलता है?2024-11-09T06:51:01+00:00

कृत कारित व अनुमोदित कर्मों का फल न्यूनाधिक होता है या समान?

प्रश्न - कृत, कारित व अनुमोदित कर्मों का फल न्यूनाधिक होता है या समान? उत्तर- परिस्थिति विशेष को छोड़कर सामान्य रूप से कृत कर्मों अर्थात् स्वयं किये हुवे बुरे कर्मों का फल कारित अर्थात् करवाये हुवे तथा अनुमोदित अर्थात् समर्थित कर्मों की अपेक्षा अधिक होता है, क्योंकि अति [...]

कृत कारित व अनुमोदित कर्मों का फल न्यूनाधिक होता है या समान?2024-11-09T06:46:24+00:00

कर्मों का फल कौन देता है?

जीवों द्वारा किए गए कर्मों का मुख्य फल दाता सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, परमपिता परमात्मा ही है। किन्तु मनुष्यों के कर्मों का फल केवल ईश्वर ही देता है, ऐसा नहीं है। बाल्य काल में बच्चों को उनके द्वारा किए गए अच्छे बुरे कर्मों का फल उनके माता-पिता आदि द्वारा दिया जाता [...]

कर्मों का फल कौन देता है?2021-04-29T13:19:51+00:00
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