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क्या कर्मों का फल जीव स्वयं भी ले सकता है?

प्रश्न - क्या कर्मों का फल जीव स्वयं भी ले सकता है? उत्तर- इस विषय में एक बात जान लेनी आवश्यक है कि ‘फल भोगने में जीवात्मा परतन्त्र है’ इसका अर्थ यह नहीं लेना चाहिए कि जीवात्मा सर्वथा परतन्त्र है और अपने किसी भी कर्म का फल वह [...]

क्या कर्मों का फल जीव स्वयं भी ले सकता है?2021-05-15T14:47:13+00:00

जीव कर्म करने में तो स्वतंत्र है, परन्तु फल भोगने में परतंत्र क्यों?

प्रश्न - जीव कर्म करने में तो स्वतंत्र है, परन्तु फल भोगने में परतंत्र क्यों? उत्तर- जीवात्मा अपने कर्मों का फल भोगने में परतन्त्र है इसका कारण निम्न है, प्रथम- जीवात्मा स्वयं कर्मों का फल ले नहीं सकता, क्योंकि उसका ज्ञान तथा सामर्थ्य बहुत कम है। जीवन भर [...]

जीव कर्म करने में तो स्वतंत्र है, परन्तु फल भोगने में परतंत्र क्यों?2024-11-12T06:15:30+00:00

नियत विपाक कर्मों, जिन कर्मों का फल मिलना निश्चित हो गया है ऐसे

प्रश्न - नियत विपाक कर्मों, जिन कर्मों का फल मिलना निश्चित हो गया है, ऐसे कर्म का फल जन्म धारण के समय ही एक साथ पूरा का पूरा मिल जाता है या बाद में भी मिलता रहता है? उत्तर- नियत विपाक कर्मों का फल जाति, आयु और भोग [...]

नियत विपाक कर्मों, जिन कर्मों का फल मिलना निश्चित हो गया है ऐसे2024-11-12T06:11:46+00:00

जीवन-मुक्त व्यक्ति अपने बचे शुभ-अशुभ कर्मों का फल भोगता है या नहीं?

प्रश्न - जीवन-मुक्त व्यक्ति अपने बचे शुभ-अशुभ कर्मों का फल भोगता है या नहीं? उत्तर- जी हाँ, भोगता है। जीवन-मुक्त मनुष्य उस को कहते हैं, जिसने ईश्वर साक्षात्कार कर लिया हो तथा ईश्वर से समाधि अवस्था में प्राप्त विशेष ज्ञान-विज्ञान से अविद्या के समस्त संस्कारों को दग्धबीज अवस्था [...]

जीवन-मुक्त व्यक्ति अपने बचे शुभ-अशुभ कर्मों का फल भोगता है या नहीं?2024-11-12T06:06:29+00:00

उपासना एक प्रकार का मानसिक कर्म है तो

प्रश्न -उपासना एक प्रकार का मानसिक कर्म है, तो फिर उपासना को कर्म से भिन्न क्यों माना गया है? वह तो कर्म के क्षेत्र में ही आ जाएगी। उत्तर- उपासना का वास्तविक अर्थ ईश्वर के आनन्द में मग्न हो जाना, उसकी अनुभूति करना ही है। यह अनुभूति शरीर, [...]

उपासना एक प्रकार का मानसिक कर्म है तो2024-11-12T06:02:17+00:00

क्या निष्काम कर्मों का भी फल मिलता है?

प्रश्न - क्या निष्काम कर्मों का भी फल मिलता है? उत्तर- जी हाँ! निष्काम कर्मों का भी फल मिलता है। इस विषय में ध्यान रखने योग्य बात यह है कि कि निष्कामता का अर्थ यह नहीं होता कि कर्त्ता की कोई भी कामना न हो। प्रत्येक कर्म के [...]

क्या निष्काम कर्मों का भी फल मिलता है?2024-11-12T05:47:22+00:00

क्या शुभ व अशुभ कर्म बराबर किये जाएँ, तो वे बिना ही फल दिए नष्ट हो सकते हैं?

प्रश्न - क्या शुभ व अशुभ कर्म बराबर किये जाएँ, तो वे बिना ही फल दिए नष्ट हो सकते हैं? उत्तर- मनुष्य प्रत्येक विषय में पूर्ण ज्ञानी न होने के कारण अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के कर्म करता है। दोनों प्रकार के कर्मों का अपना-अलग अस्तित्व है। [...]

क्या शुभ व अशुभ कर्म बराबर किये जाएँ, तो वे बिना ही फल दिए नष्ट हो सकते हैं?2024-11-12T05:43:45+00:00

किन्हीं शास्त्रों में लिखा है कि ‘ज्ञानात् मुक्ति’ ज्ञान से ही मुक्ति हो जाती है। तो

प्रश्न -किन्हीं शास्त्रों में लिखा है कि ‘ज्ञानात् मुक्ति’ ज्ञान से ही मुक्ति हो जाती है। तो फिर कर्म करने की आवश्यकता ही क्या है? उत्तर- यह सत्य है कि शास्त्र में लिखा है कि ज्ञान से मुक्ति होती है किन्तु इसका अर्थ यह नहीं लेना चाहिये कि [...]

किन्हीं शास्त्रों में लिखा है कि ‘ज्ञानात् मुक्ति’ ज्ञान से ही मुक्ति हो जाती है। तो2021-05-15T12:45:07+00:00

मनुष्य को जो सुख-दुःख मिलता है क्या वह

प्रश्न - मनुष्य को जो सुख दुख मिलता है, क्या वह उसके अपने ही कर्मों का फल है या वह किसी अन्य के भी कर्म के कारण सुख-दुख प्राप्त कर सकता है? उत्तर- सिद्धान्त यह है कि मनुष्य को अपने ही कर्मों का फल मिलता है, दूसरे के [...]

मनुष्य को जो सुख-दुःख मिलता है क्या वह2024-11-11T06:24:53+00:00

मनुष्य के द्वारा जिस स्वरूप वाला व जिस मात्रा अर्थात् स्तर वाला अच्छा या बुरा कर्म किया जाता है तो क्या उसे फल भी उसी स्वरूप व उसी मात्रा अर्थात् स्तर वाला मिलता है?

प्रत्येक अच्छे-बुरे कर्म का फल कितनी मात्रा में सुख-दुख रूप में मिलेगा, यह ईश्वर ने अनादि काल से निश्चित कर रखा है। प्रत्येक जीवात्मा को उसी निर्धारित मात्रा के अनुसार ईश्वर कर्मों का फल प्रदान करता है। किन्तु प्रत्येक अच्छे-बुरे कर्म का फल अलग-अलग मात्रा में नहीं दिया जाता बल्कि [...]

मनुष्य के द्वारा जिस स्वरूप वाला व जिस मात्रा अर्थात् स्तर वाला अच्छा या बुरा कर्म किया जाता है तो क्या उसे फल भी उसी स्वरूप व उसी मात्रा अर्थात् स्तर वाला मिलता है?2021-05-02T07:44:33+00:00
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