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मनुष्य कितनी अवस्था का होकर कर्म करना प्रारम्भ करता है?

प्रश्न - मनुष्य कितनी अवस्था का होकर कर्म करना प्रारम्भ करता है? उत्तर- जब बालक अच्छे-बुरे कर्मों को समझने लायक हो जाता है, तब से वह कर्माशय बनाने वाले सुख-दुख रूप में फल देने वाले कर्मों को प्रारम्भ कर देता है। अथवा ऐसे कह सकते हैं कि जब [...]

मनुष्य कितनी अवस्था का होकर कर्म करना प्रारम्भ करता है?2024-11-14T06:37:29+00:00

अपने पाप कर्मों का दुखरूप फल भोगने वाले व्यक्ति के दुख दूर

प्रश्न - अपने पाप कर्मों का दुखरूप फल भोगने वाले व्यक्ति के दुख दूर करने का प्रयास करना क्या ईश्वर की न्याय व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं है? उत्तर- रोगी, अभावग्रस्त, अनाथ, असहाय, निर्बल, दुखी व्यक्तियों को तन, मन, धन आदि किसी भी प्रकार से सहायता करके उनके दुख [...]

अपने पाप कर्मों का दुखरूप फल भोगने वाले व्यक्ति के दुख दूर2024-11-14T06:35:25+00:00

क्या जीवनमुक्त व्यक्ति से मिश्रित अर्थात शुभाशुभ कर्म होते हैं?

प्रश्न - क्या जीवनमुक्त व्यक्ति से मिश्रित अर्थात शुभाशुभ कर्म होते हैं? उत्तर- जीं हाँ, जीवनमुक्त व्यक्ति भी मिश्रित कर्म करता है। यद्यपि यह जान-बूझकर योजना बना कर हिंसा आदि कर्म नहीं करता। पुनरपि अज्ञानवशात् शीघ्रता में, बिना पूर्ण परीक्षण के कहीं न कहीं, किसी न किसी विषय [...]

क्या जीवनमुक्त व्यक्ति से मिश्रित अर्थात शुभाशुभ कर्म होते हैं?2024-11-12T06:29:19+00:00

क्या मुक्ति में जीव कर्मों को करता है और क्या उनका फल मिलता है?

प्रश्न - क्या मुक्ति में जीव कर्मों को करता है और क्या उनका फल मिलता है? उत्तर- मुक्ति में जीव कर्म नहीं करता है। क्योंकि कर्म की परिभाषा मुक्ति में लागू नहीं होती है। शरीर-इन्द्रिय-मन से की जाने वाली चेष्टा विशेष को कर्म के अन्तर्गत माना जाता है। [...]

क्या मुक्ति में जीव कर्मों को करता है और क्या उनका फल मिलता है?2024-11-12T06:26:21+00:00

कर्मों का कर्त्ता

प्रश्न - कर्मों का कर्त्ता कौन है? उत्तर- शरीर में इच्छापूर्वक किये जाने वाले कर्मों का कर्त्ता स्वयं जीवात्मा ही होता है। यद्यपि कर्म करने/न करने से सम्बन्धित प्रेरणा, उत्साह, आदेश, अन्य व्यक्तियों से भी मिलते हैं, जो कर्म करने/न करने में निमित्त बनते हैं, किन्तु मुख्य कर्त्ता [...]

कर्मों का कर्त्ता2024-11-09T06:35:35+00:00

प्रायश्चित क्या है?

प्रश्न - प्रायश्चित क्या है? क्या बुरे कर्मों के फल को नष्ट या कम किया जा सकता है? उत्तर- किये गये बुरे कर्मों के प्रति मन में ग्लानि, खिन्नता, दुख की अनुभूति करना तथा ऐसे कर्मों को भविष्य में न करने की दृढ़ प्रतिज्ञा करना प्रायश्चित कहलाता है। [...]

प्रायश्चित क्या है?2024-11-10T12:16:31+00:00

मनुष्य के द्वारा जिस स्वरूप वाला व जिस मात्रा

प्रश्न - मनुष्य के द्वारा जिस स्वरूप वाला व जिस मात्रा अर्थात स्तर वाला अच्छा या बुरा कर्म किया जाता है, तो क्या उसे फल भी उसी स्वरूप व उसी मात्रा अर्थात स्तर वाला मिलता है? उत्तर- प्रत्येक अच्छे-बुरे कर्म का फल कितनी मात्रा में सुख-दुख रूप में [...]

मनुष्य के द्वारा जिस स्वरूप वाला व जिस मात्रा2024-11-11T06:20:51+00:00

अच्छे कर्म करने वाले अर्थात् धार्मिक व्यक्ति पर बाधा

प्रश्न - अच्छे कर्म करने वाले अर्थात धार्मिक व्यक्ति पर बाधा कष्ट आते हैं? क्या यह उनके अच्छे कर्मों का फल है? उत्तर- अच्छे कर्म करने वाले व्यक्ति को ईश्वर की तरफ से सदा सुख, शान्ति, प्रेम, सहयोग, उत्साह, प्रेरणा आदि ही मिलते हैं। इसमें किसी भी प्रकार [...]

अच्छे कर्म करने वाले अर्थात् धार्मिक व्यक्ति पर बाधा2024-11-11T03:40:33+00:00

इसमें प्रमाण क्या है कि इस जन्म के कर्म इसी जन्म में फल देते हैं?

प्रश्न - इसमें प्रमाण क्या है कि इस जन्म के कर्म इसी जन्म में फल देते हैं? उत्तर- अविद्यादि क्लेषों से युक्त होकर किये गए कर्मों का फल वर्त्तमान तथा अगले जन्म में भोगने योग्य होता है। -योग दर्शन २//१२ (२)    जो व्यक्ति, विद्वानों, वृद्धों की विनम्रता से, [...]

इसमें प्रमाण क्या है कि इस जन्म के कर्म इसी जन्म में फल देते हैं?2024-11-11T03:35:47+00:00

जब कर्मों का फल अवश्य ही मिलता है और उनसे

प्रश्न - जब कर्मों का फल अवश्य ही मिलता है और उनसे कोई बच नहीं सकता तो फिर ईश्वरोपासना करने की क्या आवश्यकता है? उत्तर- यह बात सत्य है कि किये गये कर्मों का फल अवश्य मिलता है। चाहे कितना ही जप-तप करो, कितने ही यज्ञ-दान करो, फिर [...]

जब कर्मों का फल अवश्य ही मिलता है और उनसे2024-11-12T06:23:16+00:00
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