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भाग्य और पुरुषार्थ में क्या भेद है, दोनों में कौन बड़ा है?

प्रश्न - भाग्य और पुरुषार्थ में क्या भेद है, दोनों में कौन बड़ा है? उत्तर- दार्शनिक दृष्टि से भूतकाल में किये कर्मों का फल जाति, आयु, भोग के रूप में मिलना ‘भाग्य’ कहलाता है और जो वर्त्तमान में कर्म किये जा रहे हैं, वह ‘पुरुषार्थ’ कहलाता है। उस [...]

भाग्य और पुरुषार्थ में क्या भेद है, दोनों में कौन बड़ा है?2024-11-17T12:20:40+00:00

परिवार, समाज, राष्ट्र में अनेक बार यह प्रतिदिन

प्रश्न – परिवार, समाज, राष्ट्र में अनेक बार यह प्रतिदिन देखने में आता है कि लोग चोरी, मिलावट, दुराचार आदि अनैतिक पाप कर्मों को करके झूठ बोलकर बदनामी से बच जाते हैं, हानि, दण्ड से बच जाते हैं, मुकदमा जीत जाते हैं । फिर यह कैसे माना जाय [...]

परिवार, समाज, राष्ट्र में अनेक बार यह प्रतिदिन2024-11-17T12:12:56+00:00

क्या हिंसा, झूठ, छल-कपट, चोरी आदि से कभी लाभ भी हो सकता है?

प्रश्न - क्या हिंसा, झूठ, छल-कपट, चोरी आदि से कभी लाभ भी हो सकता है? उत्तर- नहीं, हिंसा, झूठ आदि यमनियमों के विरोधी कर्मों से लाभ कभी नहीं होता। क्योंकि, जो हानिकारक, दुखदायी, भयभीत करने वाले कर्म होते हैं, वे ‘हिंसा’ कहलाते हैं। अतः हिंसा होगी, तो लाभ [...]

क्या हिंसा, झूठ, छल-कपट, चोरी आदि से कभी लाभ भी हो सकता है?2024-11-17T12:09:02+00:00

उपयोगितावाद अर्थात Utilitarianism क्या वर्त्तमान काल में उपयुक्त है?

प्रश्न – क्या उपयोगितावाद अर्थात Utilitarianism वर्त्तमान काल में उपयुक्त है? उत्तर- उपयोगितावाद का सरल सा तात्पर्य है अवसरवाद, अर्थात् अपने प्रयोजन को सिद्ध करने के लिए जैसा करना उचित लगे वैसा कर लेना। यदि झूठ बोलना पड़े तो झूठ बोल देना, चोरी करनी पड़े तो चोरी कर [...]

उपयोगितावाद अर्थात Utilitarianism क्या वर्त्तमान काल में उपयुक्त है?2021-05-16T07:21:23+00:00

क्या कर्म स्वयं ही अर्थात ‘बिना ईश्वर के’ फल दे सकता है?

प्रश्न - क्या कर्म स्वयं ही अर्थात 'बिना ईश्वर के' फल दे सकता है? कर्म जब क्षण में समाप्त होकर नष्ट हो जाता है तो ईश्वर भी कैसे कर्मों का फल देगा? उत्तर- बिना ही ईश्वर के स्वयं कर्म, कर्म के कर्त्ता- जीव को कर्मों का फल दे [...]

क्या कर्म स्वयं ही अर्थात ‘बिना ईश्वर के’ फल दे सकता है?2024-11-16T07:07:56+00:00

क्या नास्तिक व्यक्ति निष्काम कर्मों को कर सकता है?

प्रश्न - क्या नास्तिक व्यक्ति निष्काम कर्मों को कर सकता है? क्या अच्छे काम करने वाले को उपर्युक्त फल नहीं मिलते हैं? यदि मिलते हैं तो फिर ऐसा विचार करने में क्या हानि है, बिना विचारे तो कोई अच्छे कार्यों में प्रवृत्त भी नहीं होता है। उत्तर- नास्तिक [...]

क्या नास्तिक व्यक्ति निष्काम कर्मों को कर सकता है?2024-11-16T07:04:31+00:00

कर्मों को निष्काम बनाने के लिए क्या विधि अपनानी चाहिए?

प्रश्न - कर्मों को निष्काम बनाने के लिए क्या विधि अपनानी चाहिए? उत्तर- कर्मों को निष्काम बनाने की विधि बहुत ही सरल है। बस कर्मों के लौकिक फल की इच्छा समाप्त करते ही कर्म निष्काम बन जाते हैं, अथार्त् मन में हम जो यह भावना रखते हैं कि [...]

कर्मों को निष्काम बनाने के लिए क्या विधि अपनानी चाहिए?2024-11-16T06:58:23+00:00

संकटकाल में संकट से बचाने के लिए की गयी प्रार्थना

प्रश्न - संकटकाल में संकट से बचाने के लिए की गयी प्रार्थना से क्या ईश्वर विशेष ज्ञान-विज्ञान देता है? उत्तर- हाँ, यह संभव है कि संकट काल में अर्थात हानि, वियोग, अपमान, मिथ्या आरोप, विश्वासघात, छल-कपट आदि प्रतिकूल परिस्थितियों में, जब मन में दुख विषाद उत्पन्न हो जाता [...]

संकटकाल में संकट से बचाने के लिए की गयी प्रार्थना2024-11-16T06:53:06+00:00

क्या ईश्वर बिना ही कर्म के किसी को सुख-दुख देता है?

प्रश्न - क्या ईश्वर बिना ही कर्म के किसी को सुख-दुख देता है? उत्तर- नहीं, ईश्वर बिना ही कर्मों के किसी व्यक्ति को अपनी ओर से सुख या दुख नहीं देता है, क्योंकि वह न्यायकारी है। न्यायकारी वहीं कहलाता है, जो किसी को जितना जैसा कर्म किया हुआ [...]

क्या ईश्वर बिना ही कर्म के किसी को सुख-दुख देता है?2024-11-15T10:10:16+00:00

क्या नये कर्मों का पुराने कर्मफल पर प्रभाव पड़ता

प्रश्न - क्या नये कर्मों का पुराने कर्मफल पर प्रभाव पड़ता हूँ? अर्थात् किसी विधि से कर्म के फल को न्यून वा अधिक कर सकते हैं? उत्तर- नये कर्मों का पुराने कर्मों के फलों पर प्रभाव तो पड़ता है, किन्तु इसका तात्पर्य यह नहीं है कि कर्मों के [...]

क्या नये कर्मों का पुराने कर्मफल पर प्रभाव पड़ता2024-11-15T10:05:43+00:00
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