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बुनियादी मान्यताओं के संशोधनार्थ कुछ सत्य

                               बुनियादी मान्यताओं के संशोधनार्थ कुछ सत्य सत्य के अपनाने के अतिरिक्त हमारी उन्नति का अन्य कोई मार्ग नहीं है। लेकिन, हममें घर की हुई मान्यताओं में से सही और गलत का निर्णय करने से पहले, कुछ मौलिक जानकारियों का हमारे पास होना बहुत जरूरी है। यहां [...]

बुनियादी मान्यताओं के संशोधनार्थ कुछ सत्य2021-06-09T13:44:15+00:00

कर्मों का फल

प्रश्न - कर्मों का फल कौन देता है? उत्तर- जीवों द्वारा किए गए कर्मों का मुख्य फलदाता सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, परमपिता परमात्मा ही है। किन्तु, मनुष्यों के कर्मों का फल केवल ईश्वर ही देता है, ऐसा नहीं है। बाल्य काल में बच्चों को उनके द्वारा किए गए अच्छे [...]

कर्मों का फल2024-11-09T06:41:19+00:00

कभी किसी का प्राण झूठ बोलने से बचता हो, तो भी नहीं बचाना चाहिए?

प्रश्न - कभी किसी का प्राण झूठ बोलने से बचता हो, तो भी नहीं बचाना चाहिए? उत्तर- हमेशा सत्य के आश्रय से ही किसी का प्राण बचाना चाहिए। यदि कोई किसी के प्राण बचाने हेतू झूठ बोलता है, तो प्राण बच जायेगा। किन्तु, उस झूठ का फल पाप [...]

कभी किसी का प्राण झूठ बोलने से बचता हो, तो भी नहीं बचाना चाहिए?2024-11-17T12:25:43+00:00

समाज में ऐसा सिद्धान्त प्रचलित है कि जो कुछ सृष्टि

प्रश्न - समाज में ऐसा सिद्धान्त प्रचलित है कि जो कुछ सृष्टि में हो रहा है, वह ईश्वर की इच्छा से, ईश्वर की प्रेरणा से, ईश्वर के द्वारा ही हो रहा है। जीवात्मा तो एक साधन मात्र है, क्या यह सिद्धान्त सत्य है? उत्तर- नहीं, ऐसा मानना ठीक [...]

समाज में ऐसा सिद्धान्त प्रचलित है कि जो कुछ सृष्टि2024-11-17T12:32:05+00:00

आजकल प्रतिदिन हजारों की संख्या में गर्भ में ही

प्रश्न - आजकल प्रतिदिन हजारों की संख्या में गर्भ में ही उत्पन्न होने वाले शिशुओं को मारा जा रहा है तो क्या यह गर्भ में आने वाले जीव के कर्मों का फल है या माता-पिता का? उत्तर-गर्भ का धारण माता-पिता की इच्छा से होता है और गर्भपात भी [...]

आजकल प्रतिदिन हजारों की संख्या में गर्भ में ही2021-05-16T08:03:15+00:00

लोक में तो देखते हैं कि स्वामी सेठ अपने सेवकों का

प्रश्न ६३. - लोक में तो देखते हैं कि स्वामी सेठ अपने सेवकों का जितना पारिश्रमिक होता है उससे कम या अधिक दे देता है। इसी प्रकार ईश्वर भी किसी को अपनी ओर से बिना ही कर्म के सुख-दुख दे देगा। उत्तर- लोक में बिना ही कर्मों के [...]

लोक में तो देखते हैं कि स्वामी सेठ अपने सेवकों का2024-11-17T12:29:09+00:00

वे कौन सी परिस्थितियाँ है जिनमें झूठ बोलना पुण्य हो सकता है?

प्रश्न - वे कौन सी परिस्थितियाँ हैं, जिनमें झूठ बोलना पुण्य हो सकता है? उत्तर- ऐसी कोई परिस्थिति नहीं है, जहाँ झूठ बोलना पुण्य हो सकता है। सर्वत्र अज्ञानता, विवशता, निर्बलता आदि कारण हो सकते हैं, जिससे व्यक्ति झूठ बोलने को बाधित होता है। अतः इन कारणों को [...]

वे कौन सी परिस्थितियाँ है जिनमें झूठ बोलना पुण्य हो सकता है?2024-11-17T12:26:58+00:00

कभी किसी का प्राण झूठ बोलने से बचता हो तो भी नहीं बचाना चाहिए?

प्रश्न - कभी किसी का प्राण झूठ बोलने से बचता हो तो भी नहीं बचाना चाहिए? उत्तर- हमेशा सत्य के आश्रय से ही किसी का प्राण बचाना चाहिए। यदि कोई किसी के प्राण बचाने हेतू झूठ बोलता है तो प्राण बच जायेगा। किन्तु उस झूठ का फल पाप दुःख भी [...]

कभी किसी का प्राण झूठ बोलने से बचता हो तो भी नहीं बचाना चाहिए?2021-05-14T07:49:25+00:00

घर का स्वामी हिंसा, झूठ, चोरी, छलादि अनैतिक कर्मों से

प्रश्न - घर का स्वामी हिंसा, झूठ, चोरी, छलादि अनैतिक कर्मों से धन व साधनों को जुटाता है, भोग सभी परिवार के व्यक्ति करते हैं, क्या सभी को पाप लगेगा? उत्तर- यह सिद्धान्त है कि फल कर्त्ता को ही मिलता है, अन्यों को नहीं। घर में परिवार के [...]

घर का स्वामी हिंसा, झूठ, चोरी, छलादि अनैतिक कर्मों से2024-11-17T12:23:45+00:00

क्या किसी विशेष परिस्थिति में झूठ बोलना

प्रश्न - क्या किसी विशेष परिस्थिति में झूठ बोलना, चोरी करना, हिंसा करना शुभ कर्म होता है? उत्तर- किसी भी परिस्थिति में झूठ, हिंसा, चोरी आदि यमनियम विरुद्ध आचरण करना शुभ कर्म नहीं होता है।

क्या किसी विशेष परिस्थिति में झूठ बोलना2021-05-16T07:54:59+00:00
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