बुनियादी मान्यताओं के संशोधनार्थ कुछ सत्य

सत्य के अपनाने के अतिरिक्त हमारी उन्नति का अन्य कोई मार्ग नहीं है। लेकिन, हममें घर की हुई मान्यताओं में से सही और गलत का निर्णय करने से पहले, कुछ मौलिक जानकारियों का हमारे पास होना बहुत जरूरी है।

यहां दी जाने वाली जानकारियों का आधार वेद व हमारे श्रेष्ठ पूर्वजों द्वारा रचे ग्रंथ हैं। हालांकि, सभी विषयों की मौलिक जानकारियां ही इस श्रृंखला में दी जाएंगी, परन्तु पाठकों की अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा में जितनी जितनी वृद्धि होती जाएगी उतनी उतनी उनकी इन विषयों की सत्यता के प्रति अनुभूति बढ़ती जाएगी। इन लेखों में जहां कहीं भी ‘पूर्वज’ शब्द का प्रयोग हो उससे कृपया हमारे श्रेष्ठ पूर्वजों का ही ग्रहण करें क्योंकि वे ही हमारे अनुकरणीय हैं। पूर्वज तो हमारे कंस, रावण अदि भी हैं, परन्तु वे अनुकरणीय नहीं।

 

सलाह-बहुत अच्छा हो यदि आप लेखों की इस श्रृंखला के हर लेख से सम्बंधित कम से कम अपनी एक शंका को अपने मोबाइल के नोटपैड में लिख लेवें और समय मिलने पर या कम से कम सप्ताह में एक बार उन प्रश्नों पर 2-4 मिनट चिंतन करें। ऐसा करने पर 5-6 महीनों के पश्चात आपकी शंकाएं आधी से भी कम रह जाएंगी।

हमारे जीवन के मूलभूत विचार

1          आज की व्यवस्थाएं

2          सत्य को अपनाने के लाभ

3          सत्य और असत्य में भेद करने का हमारा सबसे महत्त्वपूर्ण साधन- बुद्धि

4          हमारे पूर्वज व हमारी संस्कृति की पश्चिमी संस्कृति से श्रेष्ठता

5          सत्य और असत्य को जानने की परीक्षाएं

6          हमारी संस्कृति का आधार- वेद

7          ईश्वर

8          सृष्टि बनाने का प्रयोजन

9          मानव का अंतिम लक्ष्य-मोक्ष

10        प्रार्थना के मायने

11        धर्म क्या है?

12        योग से सम्बन्धित कुछ विषय

13        धन का महत्त्व

14        सन्ध्या की महत्ता

15        हवन की महत्ता

16        क्या देवता 33 करोड़ हैं?

17        आर्य कौन

18        विविध

विद्वता व धार्मिकता

भाग्य

ज्योतिष

प्रमाण

परिवर्तन

 

19        आगे का कार्य