परिवर्तन
– बहुत से लोग, समाज में परिवर्तन तो चाहते हैं, पर स्वयं में परिवर्तन नहीं चाहते। प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस, न्यायिक अधिकारी, राजनेता आदि हमारे समाज से ही निकलते हैं। यदि हम इनमें परिवर्तन चाहते हैं, तो हमें स्वयं को बदलना होगा। अच्छे भविष्य के लिए कुछ त्यागना पड़ता है। यदि हम भावी पीढ़ी को अच्छा भविष्य देना चाहते हैं, तो हमें अपनी नियमित दिनचर्या से हटकर अपना कुछ समय अपनी संस्कृति के उत्थान के लिए भी देना होगा। हमें अपने comfort zone से बाहर निकल कर, अधिक से अधिक, ऋषियों के वचनों को जानना होगा। केवल यही त्याग, अच्छे भविष्य की आधारशिला रख सकता है।
–आज अधिकतर संसार असनातन सम्प्रदायों को ही मानता है। आर्यों के वंशज तो वहीं कहे जा सकते हैं जो राम, कृष्ण आदि महापुरुषों को अपना पूर्वज मानते हैं, भले ही किन्हीं कारणों से वो आज सत्य से दूर हो चुके हैं। इस श्रृंखला में अनेकों बार हमारे पूर्वजों की बड़ाई की गई है। जो हमें अपने अतीत पर गौरव करने को बाध्य करती हैं, लेकिन यह भी हमें याद रखना होगा कि भविष्य अतीत पर नहीं, वर्त्तमान पर खड़ा होता है। हमें वर्त्तमान में, अपने अतीत पर ही गर्व नहीं करते रहना है, बल्कि, अपने पूर्वजों के सुझाये मार्ग पर भी चलना है, ताकि हमारा भविष्य भी हमारे अतीत की भांति स्वर्णिम हो और हम ऋषि-ऋण से उऋण हो सकें। वे लोग संसार के लिए बहुत हानिकारक होते हैं जो वर्त्तमान में, अपने भूतकाल की बड़ाई करने के इलावा कुछ नहीं करते।
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