परम्परा और आधुनिकता
सामान्यतः परम्परा और आधुनिकता में विरोध दिखाई देता है। इस सत्य को जानने से पहले इन दोनों शब्दों का अर्थ जान लेना आवश्यक है। साधारण लोग परम्परा शब्द का अर्थ लेते हैं- जिस काम को उनके परिवार, समाज या राष्ट्र में लम्बे समय से किया जाता रहा हो। यहाँ वे साधारण जन ‘लम्बे समय’ का अर्थ कुछ सौ वर्ष ही लगा पाते हैं। वस्तुतः लम्बे समय’ का अर्थ है- मानव के इस सृष्टि में उत्पन्न होने से अब तक का समय। मानव को इस सृष्टि में उत्पन्न हुए लगभग 2 अरब वर्ष हो गए हैं। तब से अब तक व्यक्ति के परिवार, समाज या राष्ट्र द्वारा किए गए कर्मों की दिशा को परम्परा कहा जा सकता है। क्योंकि, अपनी व्याख्या में हमने 2 अरब वर्षों के लम्बे समय का उल्लेख किया है, इसलिए इस तरह से परम्परा शब्द के अर्थ को समझना कुछ मुश्किल प्रतीत हो सकता है। इस कारण, परम्परा शब्द के अर्थ को हम एक दूसरे तरीके से समझने का प्रयास करते हैं।
सब कुछ हम अपने अनुभव से ही नहीं सीखते। ज्ञान भी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में प्रेषित होता है। हमारी सम्पूर्ण भौतिक व आध्यात्मिक प्रगति इसी सत्य पर टिकी है। ज्ञान का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में प्रेषित होना ही परम्परा है, बशर्ते कि वह ज्ञान हमारी भौतिक व आध्यात्मिक प्रगति का कारण हो। जो भी ज्ञान हमारी भौतिक व आध्यात्मिक प्रगति का कारण होगा, उसका आधुनिक होना तो अवश्यम्भावी है। ‘परम्परा’ शब्द को इस दृष्टिकोण से देखने में आधुनिकता का इसके साथ कोई विरोध प्रतीत नहीं होगा। यहीं इन दो शब्दों के वास्तविक मायने हैं।
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