धन का महत्त्व
-धन का महत्त्व इसी बात से सिद्ध होता है कि धन के बगैर हम तकरीबन सभी धार्मिक कार्यों को नहीं कर सकते। हमारी संस्कृति में धन के अभाव को बहुत बड़ा अभिशाप माना जाता है। जहाँ यह सत्य है, कि तकरीबन सभी दूसरों की भलाई के कार्यों के लिए धन की आवश्यकता होती है, वहां यह भी सत्य है कि धन की, बुराईयों को अपनी ओर खींचने की क्षमता अकथनीय है। इस दुविधा को दूर करने के लिए हमारी संस्कृति ने एक मार्ग सुझाया है। यह मार्ग है ‘त्याग’ का। किसी साधन का उपभोग करते समय, जिस लक्ष्य के लिए उस साधन को जुटाया गया है, उद्देश्य की पूर्ति हो जाने पर, उस साधन से किसी तरह का मोह नहीं रखना चाहिए। कहा जाता है कि हमें त्यागते हए उपभोग करना चाहिए। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। अगर हमारा ध्येय दिल्ली जाना है तो, दिल्ली लेके जाने वाली ट्रेन, सीट आदि से हमारा मोह तभी तक होता है, जब तक हम दिल्ली नहीं पहुँच जाते।
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