आर्य कौन
-‘आर्य’ शब्द का अर्थ होता है श्रेष्ठ। हमारे पूर्वज ‘मानवता’ को जीते थे, इसलिए श्रेष्ठ कहलाते थे। हमारे किसी भी पुराने साहित्य में ‘आर्य’ के अतिरिक्त ओर कोई भी सम्बोधन नहीं मिलता। हम ‘आर्यों’ की सन्तान हैं। परन्तु, क्या श्रेष्ठता से संबंधित कुछ मौलिक जानकारियां प्राप्त कर लेने पर हम अपने आप को ‘आर्य’ कह सकते हैं? यह वैसा ही है, जैसे डाक्टरी के कालेज में दाखिला होने पर ही उस व्यक्ति को ‘डाक्टर’ कहना शुरू कर दिया जाता है, परन्तु वह डाक्टर तो डाक्टरी की पूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के बाद ही बनता है।
– जैसे किसी भी व्यक्ति को डाक्टर, इंजीनियर अथवा अध्यापक बनने के लिए क्रमश: डाक्टर, इंजीनियर व अध्यापक की औलाद होना आवश्यक नहीं, आवश्यक है तो केवल संबन्धित ज्ञान को आत्मसात् करना। ठीक उसी तरह आर्य बनने के लिए आवश्यक है, आर्यों के सिद्धान्तों को आत्मसात् करना। ‘आर्य’ बनना डाक्टर, इंजीनियर, अध्यापक आदि की भांति एक योग्यता है, जिसे हासिल करने के लिए कुछ सिद्धांतों को जानना व जीना आवश्यक है। केवल जन्म के आधार पर आर्य नहीं बना जा सकता।
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