आगे का कार्य
-इन वेद सम्मत मौलिक जानकारियों के साथ हम वभिन्न विषयों पर अपनी मान्यताओं को संशोधित कर चुके हैं। हमारी संस्कृति मानवता की पर्याय है। अपनी संस्कृति को ऊपर उठाना, मानवता को ऊपर उठाना ही है। अपनी संस्कृति के उत्थान के लिए अत्यन्त तप की आवश्यकता है। आज, मानवता त्राहि-त्राहि कर रही है। हमें, ऐसे समाज की आधारशिला रखनी है, जहां हरेक व्यक्ति सुखपूर्वक रहते हुए अपने जीवन के अंतिम लक्ष्य की ओर, बगैर किसी बाधा के बढ़ सके। इसके लिए हमें अपनी दिनचर्या को बदलते हुए, अपने दो हज़ार साल पहले के पूर्वजों के ज्ञान को अधिक से अधिक आत्मसात करना होगा।
-आगे के ज्ञान के लिए यहां कुछ पुस्तकें सुझाई जा रही हैं। 1 महर्षि दयानन्द जी द्वारा लिखित-सत्यार्थ प्रकाश। पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ मूलतः हिन्दी में लिखी गई है। इसकी अंग्रेजी translation ‘Light of Truth’ के नाम से उपलब्ध है। क्योंकि, हमें इस तरह के साहित्य को पढ़ने की आदत नहीं होती, इसलिए, इस पुस्तक को पढ़ने की एक खास विधा है। यह पुस्तक ‘प्रश्न उत्तर’ शैली में लिखी गई है। प्रारम्भ में, केवल उन्हीं प्रश्नों के उत्तर पढ़ने चाहिए, जो प्रश्न पढ़ने वाले को भाएँ। पहली बार में, जो उत्तर पढ़े जाते हैं, उनका केवल 10 % ही समझ में आता है। दूसरी बार में, जो उत्तर पढ़े जाते हैं, उनका 50 % समझ में आ जाता है। इस तरह पुस्तक को अनेकों बार पढ़ें। 2 पंडित गंगा प्रसाद उपाध्याय जी द्वारा लिखित पुस्तकें- आस्तिकवाद, वेद प्रवचन, वैदिक संस्कृति और ईशोपनिषद। अब तक जो जानकारियां दी गई हैं, वो केवल बीजरूप में ही हैं। यह सभी पाठकों का दायित्व है कि वे इन्हें अधिक से अधिक पल्वित करें।
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