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घर का स्वामी केवल अपने लिए तो कमा नहीं रहा है

प्रश्न - घर का स्वामी केवल अपने लिए तो कमा नहीं रहा है, वह तो सभी के लिए कमाता है और सबको खिलाता है तो फिर वह अकेला दोष का भागी क्यों होगा? उत्तर- क्योंकि घर के शेष व्यक्ति केवल भोक्ता हैं, आश्रित हैं, स्वयं कर्त्ता नहीं हैं, [...]

घर का स्वामी केवल अपने लिए तो कमा नहीं रहा है2024-11-15T10:01:53+00:00

क्या कुदिन व सुदिन भी होते हैं?

प्रश्न - क्या कुदिन व सुदिन भी होते हैं? उत्तर- दिन तो काल की सीमा का वाचक है। यह कोई चेतन वस्तु नहीं है, जो अपना प्रभाव किसी पर डालती हो। सूर्योदय से सूर्यास्त तक का काल दिन कहलाता है और सूर्यास्त से सूर्योदय का काल रात्रि कहलाती [...]

क्या कुदिन व सुदिन भी होते हैं?2024-11-14T06:58:00+00:00

जब मनुष्य ने बुरे कर्म किये, परिणामस्वरूप

प्रश्न - जब मनुष्य ने बुरे कर्म किये, परिणामस्वरूप फल भोगने के लिए पशु योनि में गया वहाँ पर कुछ वर्षों तक कुछ योनियों में बुरे कर्मों का फल भोगा। अब बुरे कर्म समाप्त होने पर वह मनुष्य योनि में कैसे आयेगा? क्योंकि पशु योनि में उसने मनुष्य [...]

जब मनुष्य ने बुरे कर्म किये, परिणामस्वरूप2024-11-14T06:55:03+00:00

क्या वृक्ष, लता, गुल्म आदि योनियों में भी कर्म होते हैं?

प्रश्न - क्या वृक्ष, लता, गुल्म आदि योनियों में भी कर्म होते हैं? उत्तर- वृक्षादि योनियों की स्थिति, गतिविधि आदि को देखकर अधिकांश यही संभावना लगती है कि इन योनियों में पशु, पक्षी, कीट, पतंग की तरह कर्म नहीं होते हैं। ये योनियाँ मात्र अपने भोगों को ही [...]

क्या वृक्ष, लता, गुल्म आदि योनियों में भी कर्म होते हैं?2021-05-16T04:53:08+00:00

मनुष्य शरीर से भिन्न पशु-पक्षी कीट, पतंग आदि योनियों में भी

प्रश्न - मनुष्य शरीर से भिन्न पशु-पक्षी, कीट, पतंग आदि योनियों में भी जीव कर्म करता है या वे केवल भोग योनियां हैं? उत्तर- इस पृथ्वी पर जीवात्माओं के तीन प्रकार के शरीर होते हैं। कर्मदेह, उपभोगदेह, उभयदेह। मनुष्य से भिन्न जितने भी पशु, पक्षी, कीट, पतंगादि हैं, [...]

मनुष्य शरीर से भिन्न पशु-पक्षी कीट, पतंग आदि योनियों में भी2024-11-14T06:51:17+00:00

क्या जीवात्मा के सारे के सारे कर्म भोगे जा कर कभी नितान्त समाप्त अर्थात शून्य भी हो जाते हैं?

प्रश्न - क्या जीवात्मा के सारे के सारे कर्म भोगे जा कर कभी नितान्त समाप्त अर्थात शून्य भी हो जाते हैं? उत्तर- ऐसा कभी नहीं होता कि किसी भी जीव का कर्माशय नितान्त रिक्त अर्थात् शून्य स्थिति वाला हो जाए। जैसे जीवात्मा अनादि, काल से अनन्त स्वरूप वाला [...]

क्या जीवात्मा के सारे के सारे कर्म भोगे जा कर कभी नितान्त समाप्त अर्थात शून्य भी हो जाते हैं?2024-11-14T06:45:57+00:00

क्या जीव कर्म करते हुवे थक जाता है?

प्रश्न -  क्या जीव कर्म करते हुवे थक जाता है? उत्तर- नहीं, जीव कभी भी कर्म करता हुआ थकता नहीं है। शरीर, इन्द्रिय, मनादि जीव के करण अर्थात साधन थकते हैं। क्योंकि ये शरीरादि करण प्रकृति से बने होते हैं, उनका सामर्थ्य, शक्ति सीमित होती है अतः थक [...]

क्या जीव कर्म करते हुवे थक जाता है?2021-05-16T04:44:46+00:00

क्या ज्ञान के बिना या अल्प ज्ञान से किए जाने वाले कर्मों का भी फल मिलता है?

प्रश्न - क्या ज्ञान के बिना या अल्प ज्ञान से किए जाने वाले कर्मों का भी फल मिलता है? उत्तर- जी हाँ, अज्ञान से किए गए कर्मों का भी फल ईश्वर द्वारा मिलता है, चाहे वे अच्छे हों या बुरे। क्योंकि, उन कर्मों से अन्यों को सुख-दुख तो [...]

क्या ज्ञान के बिना या अल्प ज्ञान से किए जाने वाले कर्मों का भी फल मिलता है?2024-11-14T06:42:10+00:00

ज्ञान योग, कर्मयोग व भक्तियोग क्या हैं?

ज्ञानयोग, कर्मयोग व भक्तियोग क्या हैं? ज्ञान-मार्ग में जीवन के हर पहलू की जानकारी तर्क द्वारा कौन, कब, कैसे, कहां आदि प्रश्नों के माध्यम से बुद्धि द्वारा निर्धारित कर प्राप्त की जाती है। बिना कर्म के ज्ञान का कोई औचित्य नहीं। कर्म में ही, ज्ञान की सार्थकता है। [...]

ज्ञान योग, कर्मयोग व भक्तियोग क्या हैं?2022-11-18T12:27:12+00:00

क्या बिना ज्ञान के भी कर्म होते हैं?

प्रश्न - क्या बिना ज्ञान के भी कर्म होते हैं? उत्तर- सामान्य सिद्धान्त तो यही है कि बिना ज्ञान के कर्म नहीं होते, क्योंकि जो कुछ भी कर्म मनुष्य करता है, वह इच्छापूर्वक करता है, और वह इच्छा सुखदायी पदार्थ को प्राप्त करने और दुखदायी पदार्थ को छोड़ने [...]

क्या बिना ज्ञान के भी कर्म होते हैं?2024-11-14T06:39:35+00:00
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