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ईश्वर का सान्निध्य हमें कैसे अभयता प्रदान करता है

ईश्वर का सान्निध्य हमें कैसे अभयता प्रदान करता है? कर्मफल व्यवस्था को समझते हुए आप यह तो जान ही चुके हैं कि कोई भी दूसरा प्राणी कर्म करने में स्वतन्त्र रहते हुए हमें दुख पहुंचा सकता है और यह आवश्यक नहीं है कि हमारा दुख प्राप्त करना  हमारे [...]

ईश्वर का सान्निध्य हमें कैसे अभयता प्रदान करता है2025-03-29T03:01:44+00:00

धार्मिकता फलीभूत कब नहीं होती

धार्मिकता फलीभूत कब नहीं होती? आज हमारे देश में तथाकथित धार्मिकों की संख्या बहुत अधिक होने के बावजूद हम अन्धकार में पड़े हैं। इन तथाकथित धार्मिकों में से बहुत कम वास्तविक धर्म को समझते हैं और वे भी अन्धकार में पड़े हैं अर्थात उनकी भी धार्मिकता फलीभूत नहीं [...]

धार्मिकता फलीभूत कब नहीं होती2025-03-05T10:28:15+00:00

अंध-विश्वास के पनपने के कारण

अंध-विश्वास के पनपने के कारण अंध-विश्वास के पनपने का आधारभूत कारण है, कारण कार्य सिद्धान्त का न जानना। कारण वो कहाता है, जिसके होने से कोई कार्य हो और जिसके न होने से वह कार्य न हो। इस परिभाषा के अनुसार किसी कार्य के कारण को जानने के [...]

अंध-विश्वास के पनपने के कारण2024-12-29T10:00:36+00:00

संस्कृत सीखने के लिए

संस्कृतम (इस साईट में दिखाए गए बहुत से वाक्य अवैदिक अर्थात पौराणिक मान्यताओं के वाचक हैं, परन्तु पौराणिक भाइयों द्वारा निर्मित यह साइट संस्कृत भाषा को बहुत सरल तरीके से सिखाती है।) संस्कृत भाषा में विसर्ग का उच्चारण

संस्कृत सीखने के लिए2024-12-19T10:04:25+00:00

बुद्धि और तर्क

बुद्धि और तर्क ठीक जैसे आंख, कानादि ईश्वर ने हमें देखने, सुनने के लिए दिए हैं, वैसे ही संसार की भिन्न-भिन्न वस्तुओं का निश्चयात्मक ज्ञान कराने के लिए ईश्वर ने हमें बुद्धि नामक यंत्र प्रदान किया है। जैसे आँख होते हुए भी, आँख का प्रयोग देखने के लिए [...]

बुद्धि और तर्क2024-12-22T11:32:07+00:00

ईश्वर के लाभ

ईश्वर के वास्तविक स्वरूप को जानने के लाभ हमारा शरीर, बुद्धि, इन्द्रियाँ, नदियाँ, पहाड़, सूर्य, अन्न, वनस्पतियां आदि, जिनसे हम सब तरह के सुख उठाते हैं और भिन्न भिन्न वैज्ञानिक खोजें आदि करते हैं, ईश्वर की ही देन हैं। ईश्वर के इस योगदान को स्वीकार करना ईश्वर नाम की सत्ता [...]

ईश्वर के लाभ2024-12-14T15:29:20+00:00

कारण-कार्य सिद्धान्त

कारण-कार्य सिद्धान्त विज्ञान का मौलिक आधारभूत सिद्धान्त है कि कोई भी कार्य कारण के बगैर नहीं होता अर्थात यदि, कोई कार्य हुआ है, तो उसके पीछे उसका कोई कारण भी अवश्य होगा व यदि कोई कारण विद्यमान है, तो उसका कार्य भी अवश्य होगा। आज के विज्ञान ने [...]

कारण-कार्य सिद्धान्त2024-12-23T04:49:32+00:00

क्लेशों का होना कोई पाप नहीं

क्लेशों का होना कोई पाप नहीं है। इस बात को समझने से पहले यह सत्य हमारे अंदर घर कर जाना चाहिए कि ईश्वर का सभी तरह का निर्माण हम आत्माओं के लाभ के लिए ही होता है। ईश्वर मनुष्य से इतर योनियों के शरीर मुख्यतः बुरे कर्मों को [...]

क्लेशों का होना कोई पाप नहीं2024-12-13T12:33:44+00:00

सत्व, रजस और तमस का प्रभाव

सत्व, रजस और तमस का प्रभाव हमारे स्थूल शरीर, मन आदि प्राकृतिक तत्वों- सत्व, रजस और तमस से बने हैं। इन तत्वों के स्वभाव का पता होने पर हम अच्छी तरह से अपने व दूसरों के बारे में जान सकते हैं। प्रत्येक सांसारिक वस्तु में प्रकृति के तीनों [...]

सत्व, रजस और तमस का प्रभाव2024-12-13T12:21:41+00:00

वेद में धर्म का स्वरूप

  वेद में धर्म का स्वरूप     मन्त्र     ओम् सं गच्छध्वं -से- उपासते। -ऋग्वेद 10//191//2 अर्थ-  हे मनुष्य लोगो! जो पक्षपातरहित न्याय सत्याचरण से युक्त धर्म है, तुम लोग उसी को ग्रहण करो, उससे विपरीत कभी मत चलो, किन्तु उसी की प्राप्ति के लिए विरोध को छोड़ [...]

वेद में धर्म का स्वरूप2024-11-10T11:50:26+00:00
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