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आर्य समाज क्या है और आर्य होने के लाभ क्या हैं?

आर्य समाज क्या है और आर्य होने के लाभ क्या हैं? आज समाज में एक बहुत बड़ी विडम्बना व्याप्त है। वो यह कि आर्य समाज हिन्दू मान्यताओं को नहीं मानता, जैसे- एक आर्य समाजी न तो मूर्ति पूजा मानता है, न अवतारवाद मानता है और बहुत सी अन्य [...]

आर्य समाज क्या है और आर्य होने के लाभ क्या हैं?2025-10-28T09:36:36+00:00

अहंकार – एक उपकरण

अहंकार - एक उपकरण -मुनि सत्यजित आर्य  वैदिक वाङ्गमय में आत्मा को उसके स्वत्व का बोध करने वाले उपकरण को अहंकार कहा गया है। हमारे हर कार्य के साथ जो मैंपना है, वही अहंकार का कार्य है। इस स्वत्व के बोध के बिना आत्मा का होना न होने [...]

अहंकार – एक उपकरण2025-10-05T12:06:00+00:00

परम्परा और आधुनिकता

परम्परा और आधुनिकता सामान्यतः परम्परा और आधुनिकता में विरोध दिखाई देता है। इस सत्य को जानने से पहले इन दोनों शब्दों का अर्थ जान लेना आवश्यक है। साधारण लोग परम्परा शब्द का अर्थ लेते हैं- जिस काम को उनके परिवार, समाज या राष्ट्र में लम्बे समय से किया [...]

परम्परा और आधुनिकता2025-10-05T11:43:10+00:00

ध्यान, सन्ध्या और उपासना के मायने

ध्यान, सन्ध्या और उपासना के मायने ध्यान- ध्यान जड़ व चेतन दोनों तरह की वस्तुओं का किया जाता है। ध्यान किसी वस्तु विशेष का न होकर किसी विचार का भी हो सकता है। जब हम ध्यान को अत्यन्त व्यापक लेते हैं, तो संध्या और उपासना भी उसमें समाहित [...]

ध्यान, सन्ध्या और उपासना के मायने2025-10-05T11:28:50+00:00

जब छः सत्ताएँ शाश्वत हैं तो त्रैतवाद क्यों

जब छः सत्ताएँ शाश्वत हैं, तो त्रैतवाद क्यों? वैसे तो छः सत्ताएँ- ईश्वर, आत्मा, प्रकृति, आकाश, दिशा और काल अनादि और अनन्त हैं। इनमें से तीन- ईश्वर, आत्मा और प्रकृति तत्वात्मक हैं व शेष तीन- आकाश (शून्य आकाश), दिशा और काल अतत्वात्मक हैं। त्रैतवाद में तीन तत्वात्मक सत्ताओं- [...]

जब छः सत्ताएँ शाश्वत हैं तो त्रैतवाद क्यों2025-09-30T10:18:44+00:00

उपासना में जप भावना व ईश्वर-समर्पण

उपासना में जप, भावना व ईश्वर-समर्पण  ईश्वर के नाम का अथवा उसके स्वरूप को बताने वाले किसी वाक्य का बार-बार पाठ करना जप कहलाता है। यह जप यदि मानसिक हो, तो अति उत्तम। जप में बोले गए शब्द अथवा वाक्य का जो वाच्य अर्थात वस्तु ईश्वर है, उसके [...]

उपासना में जप भावना व ईश्वर-समर्पण2025-09-30T10:09:50+00:00

वैराग्य क्या है इसका अभ्यास से क्या सम्बन्ध है

वैराग्य क्या है? इसका अभ्यास से क्या सम्बन्ध है? वैराग्य- सामान्यतः, हम सभी में संसार की प्राप्त व अप्राप्त वस्तुओं का भोग करने की लालसा होती है। कुछ वस्तुओं के भोग करने की लालसा का पूरा होना असम्भव होता है, जैसे, सूर्य व चाँद पर जाना। संसार की [...]

वैराग्य क्या है इसका अभ्यास से क्या सम्बन्ध है2025-09-29T10:46:14+00:00

ध्यान करते समय नींद का आना

ध्यान करते समय नींद का आना वस्तुतः, जब हमारा मन किसी एक विषय पर एकाग्र हो जाता है, तो उसकी चंचलता समाप्त हो जाती है और उसमें एक तरह की स्थिरता आ जाती है। ऐसे समय में यदि वह, अर्थात हमारा मन अपने उद्देश्य के प्रति जागरुक नहीं [...]

ध्यान करते समय नींद का आना2025-09-29T10:32:39+00:00

मन का बहुत तेज गति वाला होना एक वरदान है

मन का बहुत तेज गति वाला होना एक वरदान है। मोक्ष-प्राप्ति के अत्यंत उच्च लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, हमें ईश्वर द्वारा बहुत तेज गति वाला 'मन' प्रदान किया गया है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा अपार शक्तियों वाले 'मन' पर नियंत्रण नहीं किया जा सकता, तो उसे 'मन' [...]

मन का बहुत तेज गति वाला होना एक वरदान है2025-07-23T07:24:28+00:00

आर्य समाज की स्थापना का उद्देश्य

आर्य समाज की स्थापना का उद्देश्य सनातन संस्कृति के स्वर्णिम काल के बारे  में जानना इस भूखण्ड के लोगों के लिए अत्यन्त गौरव का विषय है, परन्तु आज इसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। आज कल हमारे देश में बच्चों को यहीं पढ़ाया जाता है [...]

आर्य समाज की स्थापना का उद्देश्य2025-07-23T06:15:45+00:00
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