केवल यह कह देना की सत्य को अपनाने से हमारी उन्नति होती है, प्रयाप्त नहीं है। क्योंकि, हम जो भी करते हैं, वो उसके लाभों से प्रेरित होकर ही करते हैं। इसलिए, सत्य अपनाने के लाभों का ओर अधिक स्पष्टता से कथन होना चाहिए।
सत्य को अपनाने के लाभ
- मान लीजिए, आप बी. ए. के छात्र हैं और एक चौथी कक्षा का विद्यार्थी दो गुना दो कितने होते हैं, जानने के लिए आपके पास आता है, उत्तर न पता होने पर जैसी ग्लानि आपको महसूस होगी वैसी ही ग्लानि आपको तब महसूस होगी जब साठ वर्ष के होने के बावजूद आप किसी को इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाएंगे कि आखिर अच्छे समाज के निर्माण में हमारे पूर्वजों का क्या योगदान है? सत्य को जानने का प्रथम लाभ यह है।
- हमारे पूर्वजों का सत्य के प्रति प्रेम देखकर हमारे भीतर उनके प्रति गौरव की अनुभूति होती है। यह गौरव की अनुभूति ही हमें राष्ट्रवादी व अपनी संस्कृति का प्रेमी बनाती है। यदि, किसी व्यक्ति में सत्य को न जानते हुए भी अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम है, तो यह निश्चित है कि उसमें सत्य को जानने के पूर्व के संस्कार विद्यमान हैं। सत्य को पुनः जानकर हम अपने पूर्वजों को सच्ची श्रद्धांजलि दे पाएंगे और उनके विरुद्ध किए जाने वाले आक्षेपों का यथोचित उत्तर दे पाने में सक्षम हो पाएंगे।
- सत्य से जीवन में निर्भीकता आती है।
- सत्यवादी व्यर्थ चिंताओं व वैचारिक उलझनों से बचता है, क्योंकि उसे झूठ बोलने की योजना बनाने का श्रम नहीं करना पड़ता।
- सत्य मानने व जानने वाले में, प्रसन्न रहने का सामर्थ्य पैदा हो जाता है।
ऊपर लिखे लाभ व्यवहारिक होने से, हमें सत्य को जानने व उसको अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए पर्याप्त हैं।
सत्य को ग्रहण करने में निम्नलिखित बाधाएं हैं :
- अपने प्रयोजन की सिद्धि करने के वशीभूत होकर, हममें सत्य को जानने की इच्छा ही न होना।
- किसी व्यक्ति या पुस्तक आदि की बात न मानने का हमारा हठ।
- हमारा अपनी मान्यताओं के असत्य होने पर भी उनके विरुद्ध न जाने का ठान लेना।
- अज्ञान- सभी भौतिक पदार्थ, ईश्वर द्वारा निश्चित व्यवस्था के अंतर्गत क्रिया करते हैं। किन्हीं भी कारणों से उन नियमों में बदलाव सम्भव ही नहीं। जैसे आग का धर्म है जलाना, अगर, किसी चीज को आग नहीं जलाती है, तो उसके भी कुछ नियम अवश्य होंगे, चाहे हम उन्हें जानते हों या नहीं। हर कार्य के पीछे कारण अवश्य होता है। ईश्वर-भक्त भी आग से जलता है, उसे भी चोट लगती है, वो भी मृत्यु को प्राप्त होता है आदि। चमत्कारों पर विश्वास करना यानि कि किसी चीज के कारण के बगैर होना मानना, सत्य को जानने के रास्ते पर एक बहुत बड़ी बाधा है।
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