विद्वता व धार्मिकता
-हर व्यक्ति शास्त्रों का विद्वान् नहीं हो सकता, परन्तु हर व्यक्ति को धार्मिक होना ही चाहिए। यहां, धार्मिक होने का अर्थ है-मधुर व हितकर बोलना, सत्य का आग्रही होना, अपना हर कर्म दूसरों के हित के लिए करना, कभी भी किसी के साथ भी अन्याय न करना, निरंतर अपनी विद्या व बुद्धि को बढ़ाने का प्रयत्न करना, सत्य को जानने वालों का संग करना व स्वाध्याय करने में कभी प्रमाद न करना, इस शरीर को देने वाले के प्रति कृतज्ञता का भाव रखना, ईश्वर को सर्वत्र विद्यमान जानना, यह जानने का प्रयत्न करना कि physics, chemistry आदि विषय, कैसे आत्मा के अंतिम प्रयोजन को सिद्ध करने में सहायक हो सकते हैं आदि।
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