सन्ध्या की महत्ता
– यहाँ सन्ध्या का अर्थ सायंकाल नहीं है, सन्ध्या का अर्थ है-सम+ध्या अर्थात अच्छी प्रकार ईश्वर का ध्यान करना। ईश्वर के चिन्तन के लिए वेद व कुछ वेदानुकूल ग्रन्थों के मंत्र छांट लिए गए हैं। इन मन्त्रों में हमारे शरीरिक बल, ज्ञान व कर्मों की उच्चता के लिए ईश्वर से प्रार्थना करने के साथ-साथ समस्त संसार को धारण और पोषण करने वाले अनन्त साम्थर्यशाली ईश्वर की स्तुति और उपासना भी की गई है। हमारी संस्कृति में प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह प्रतिदिन संध्या करे। परन्तु, ईश्वर का ध्यान करने में हमारे वर्णों द्वारा निर्धारित कर्तव्यों की अवहेलना कदापि नहीं होनी चाहिए।
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