–भाग्य ओर कुछ नहीं, बल्कि हमारे पिछले कर्मों का ही परिणाम है। क्योंकि, हमारे कर्म हमारे व्यक्तित्व पर निर्भर करते हैं, इसलिए यह कहा जा सकता है कि जैसा हमारा आज का व्यक्तित्व है, वैसा ही हमारा कल का भाग्य होगा। किसी के वर्तमान के कर्मों को देख कर उसके भविष्य के बारे में अनुमान तो लगाया जा सकता है। जैसे, अभिभावक बच्चे की बुद्धि‚ पुरुषार्थ आदि को देख कर, उसकी परीक्षा के परिणाम का अन्दाजा लगा लेते हैं, परन्तु भविष्य को कभी नहीं जाना जा सकता।
Leave A Comment