ध्यान करते समय नींद का आना

वस्तुतः, जब हमारा मन किसी एक विषय पर एकाग्र हो जाता है, तो उसकी चंचलता समाप्त हो जाती है और उसमें एक तरह की स्थिरता आ जाती है। ऐसे समय में यदि वह, अर्थात हमारा मन अपने उद्देश्य के प्रति जागरुक नहीं है, तो हमें नींद आने लगती है। ध्यान करते समय नींद आने का मतलब है कि हम एकाग्र होने में तो सफल हुए, परन्तु हम ईश्वर के प्रति व अपने उद्देश्य के प्रति जागरुक न रह पाए। ईश्वर विषय पर एकाग्र होना और अपने उद्देश्य के प्रति जागरुक रहना, दो भिन्न-भिन्न वस्तुएँ नहीं हैं। इसलिए, यह निश्चित है कि यदि, ध्यान करते समय नींद आए, तो हमारा मन तो एकाग्र हुआ है, परन्तु ईश्वर विषय पर नहीं।