ज्योतिष
-इस ब्रह्माण्ड में जितने भी पिण्ड हैं, चाहे वे स्वत: प्रकाशित हों अथवा अन्य से प्रकाशित हों, सब ज्योति कहलाते हैं। ज्योतियों के विषय से संबन्धित शास्त्र ज्योतिष कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र के अन्तर्गत बीजगणित, अंकगणित, भूगोल, खगोल और भूगर्भ विद्या आती है। ज्योतिष एक विज्ञान होने से उसमें कोई भी बात अटकल नहीं है। परन्तु, इस ज्योतिष के नाम पर फलित ज्योतिष खड़ा कर दिया गया है, जिसका सम्बन्ध जीवों के कर्मफल से जोड़ा गया है। किसी भी आर्ष ग्रन्थ में नहीं लिखा है कि किसी विशेष दिन, तिथि या मास का कर्मफल से कोई संबन्ध होता है।
-वेदों में आने वाले बुद्ध, बृहस्पति, शनि आदि शब्द ग्रहों के परिचायक नहीं। वेदों में ज्योतिष तो है परन्तु, वह फलित ज्योतिष कदापि नहीं है। फलित ज्योतिष में यह माना जाता है कि या तो जीवों को कर्म करने की स्वतंत्रता है ही नहीं, अगर है भी तो वह ग्रहों, नक्षत्रों के प्रभावों से कम है। वास्तव में, ज्योतिष का अर्थ है-ब्रह्माण्ड के पिण्डों का अध्ययन।
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