जब छः सत्ताएँ शाश्वत हैं, तो त्रैतवाद क्यों?
वैसे तो छः सत्ताएँ- ईश्वर, आत्मा, प्रकृति, आकाश, दिशा और काल अनादि और अनन्त हैं। इनमें से तीन- ईश्वर, आत्मा और प्रकृति तत्वात्मक हैं व शेष तीन- आकाश (शून्य आकाश), दिशा और काल अतत्वात्मक हैं। त्रैतवाद में तीन तत्वात्मक सत्ताओं- ईश्वर, आत्मा और प्रकृति को ही लिया जाता है, क्योंकि शेष तीन व्यवहार की दृष्टि से होते हुए भी वस्तु-शून्य हैं।
अब आकाश दो तरह का होता है- एक खाली स्थान और दूसरा प्रकृति से बना हुआ। खाली स्थान वाले आकाश के बारे में ऊपर कहा ही जा चुका है कि वह अतत्वात्मक है और त्रैतवाद में तत्वात्मक सत्ताओं को ही लिया जाता है। प्रकृति से बनने वाला आकाश, जिसकी वैशेषिक दर्शन में चर्चा है, तत्वात्मक है और वह त्रैतवाद में प्रकृति के अन्तर्गत ही आ जाता है।
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